पटना / बेतिया : विशेष संवाददाता
Nishant Kumar Sadbhav Yatra:
बिहार में सत्ता का हस्तांतरण होने के बाद नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार अब राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं। आज से वे बिहार में यात्रा पर निकले हैं। अपने पिताजी नीतीश कुमार की तरह बिहार के हर जिलों में जनता से सीधा संवाद करेंगे। आज अपनी पहली और बड़ी जनसंपर्क यात्रा के क्रम में निशांत कुमार के लिए सद्भाव यात्रा उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत बन रही है। निशांत कुमार इस यात्रा के जरिए जेडीयू की रणनीति और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पैठ को मजबूत कर पाएंगे ! निशांत कुमार ने आज अपने पिता नीतीश कुमार के आशीर्वाद के साथ “सद्भाव यात्रा” की शुरुआत की। पटना से प्रस्थान के पूर्व उन्होंने नीतीश जी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त किया और बिहार के एकीकरण का संकल्प दोहराया। तो क्या ये सद्भाव यात्रा राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के बाद जेडीयू को एक सियासी बूस्टर देगी।

समझा जाता है कि निशांत के प्रभाव में आकर कुशवाहा समाज के युवाओं का दल उनकी ओर आकर्षित होगा। ये जेडीयू के लिए बहुत बड़ा मौका साबित होने वाला है। निशांत के बाहर निकलने के बाद कार्यकर्ताओं में एक उम्मीद की लहर उठी है। नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ रहे। उन्होंने फ्रंट पर आकर निशांत कुमार को भी सपोर्ट नहीं किया। पार्टी ने सावधानी के साथ निशांत को लॉन्च किया है। इसका असर ये हुआ कि डायरेक्ट परिवारवाद के दाग से नीतीश कुमार भी बच गए।
2005 से 2026 तक अपने दो दशकों के कार्यकाल में पूर्व सीएम और निशांत कुमार के पिता नीतीश कुमार ने 16 यात्राएं शुरू की। ये सभी यात्राएं पश्चिम चंपारण से शुरू हुईं। पश्चिम चंपारण से यात्रा शुरू करने का राजनीतिक महत्व निशांत को भी मालूम है। निशांत कुमार यात्रा के जरिए ही अपनी पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। निशांत कुमार की ये यात्रा पूरे राज्य में चलेगी। इस यात्रा का उद्देश्य किसी को भाषण पिलाना नहीं है। इस यात्रा का मकसद लोगों से सीधे संवाद करना है। निशांत कुमार ने कहा भी है कि सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चलने का मेरा संकल्प है। साथ ही लोगों को अपने पिता के किए गए विकास कार्यों के प्रति जागरूक भी करना है। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जेडीयू में आए एक खालीपन को निशांत कुमार की यही यात्रा अब भरपाई करेगी।

