Congress Working Committee (CWC) meeting in Delhi: मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक हुई। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनियां गाँधी , राहुल गाँधी, और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री समेत वर्किंग कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।आज नई दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक रणनीति और देशव्यापी आंदोलन चलाने पर चर्चा हुई। इस बैठक का एजेंडा एसआईआर में कथित अनियमितता रहा।
कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। कार्यकारिणी की बैठक में इस विरोध प्रदर्शन को देशव्यापी बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और उनके इस्तीफे की मांग पर चर्चा हुई। गोवा के कांग्रेस प्रभारी माणिकराव ठाकरे ने बैठक में आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और इसके खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक पार्टी से देशव्यापी आंदोलन करने का आह्वान किया। इस मुद्दे को जिला और ब्लॉक स्तर तक ले जाने और आगामी इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले साझा रणनीति बनाने पर विचार किया गया।

ममता बनर्जी ने पहले ही इंडिया गठबंधन की बैठक 30 सितम्बर को बुलाने की वकालत कर चुकी है।
आपको बता दें कि एसआईआर में कथित अनियमितता मामले पर सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा।
जानिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बैठक में क्या कहा
#CWC: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। खरगे ने कहा कि मोदी सरकार देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव को बेहद ही कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश के तहत मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मोदी सरकार की ‘कठपुतली’ बन गए हैं। ये लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आज की बैठक उससे भी महत्वपूर्ण है। फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेवारी खड़ी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी हक को बचाने के लिए फिर लड़ना पड़ रहा है।हमारे पुरखों ने जिस मजबूत लोकतंत्र की नीव अपने त्याग और बलिदानों से रखी थी, लोकतंत्र की उस नींव को मोदी सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है। साजिश के साथ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाये जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली बन गया है। यह भारतीय लोकतंत्र की उस सोच और भावना के विपरीत है, जिसके तहत यह तय किया गया कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो और हर वोट की निष्पक्ष गिनती हो।
बाबा साहेब डॉ अंबेडकर ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कहा था —
“Franchise is a most fundamental thing in a democracy। कोई भी व्यक्ति, जिसे हमारे संविधान के हिसाब से voter list में शामिल किया जाना चाहिए, उसे किसी local Government के prejudice या किसी officer की whim पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।”
बाबा साहेब ने कहा था, किसी अफसर की मर्जी से नाम नहीं कटेगा। आज अफसर BJP और मोदी सरकार के इशारे पर मनमर्जी से नाम काट रहे है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबा साहेब जानते थे कि बिना लोकतांत्रिक हिस्सेदारी के गरीब और वंचित लोगों की कोई सुनवाई नहीं होगी। इसीलिए उन्होंने भारत के हर adult citizen को वोट का अधिकार देने की ज़बर्दस्त पैरवी की थी। संविधान सभा में हुई बहस में डा. अंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज कहा था।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लेकिन आज इसका उलटा हो रहा है। रक्षक ही भक्षक बन गया है। संविधान ने जिसे पूरी ताक़त दी, जनता के वोट का चौकीदार बनाया, वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उसके अपने साथी भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है?
दिसम्बर 1988 में इसी देश के प्रधानमंत्री स्व० राजीव गाँधी जी ने युवाओं को अधिकार दिलाने के लिए मताधिकार की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 कर दिया था। और एक प्रधानमंत्री मोदी जी हैं जो GenZ से इतना नाराज़ हैं कि उन्होंने साज़िशन युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की योजना बना डाली। चुपचाप Form 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया। यह पूरी तरह से ग़ैरक़ानूनी है।नौकरी तो दी नहीं, अब वोट का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं। नौजवान सवाल पूछेगा, उखाड़ फेंकेगा, इसका डर मन में बैठ गया है। लेकिन ये हक कोई खैरात में नहीं मिला है, लाखों लोगों ने इसके लिए कुर्बानियां दी हैं। मोदी शाह जैसे लोग चाहे जितने भी षड्यंत्र कर लें, कांग्रेस उन्हें सफल नहीं होने देगी। ये लोकतंत्र, ये वोट का हक, ये हमारी विरासत है, जो खून पसीने से सींची है। कोई तानाशाह उसे बर्बाद कर दे, ये हम होने नहीं देंगे।
हमारी लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्तियों के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के मतदाताओं के अधिकारों, संविधान और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने को लेकर है।
इस मौके पर मैं राहुल गांधी जी को बधाई देना चाहूंगा क्योंकि उन्होने सबसे पहले जिन-जिन बातो को उठाया वे प्रामाणिक रूप से सही साबित हुए हैं। ये बात देश के लोग मान रहे हैं। राहुल जी ने महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के मामले में दस्तावेजों के साथ मतदाता आंकड़ों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए था। डुप्लीकेट मतदाताओं, doubtful addresses, एक ही address पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और Form-6 से जुड़ी Entry को लेकर उन्होने जो तथ्य रखे थे, उस दिशा में चुनाव आयोग ने थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो आज वो कठघरे में नहीं होते और उनकी विश्वसनीयता बची रहती। मैं उन सभी कार्यकर्ताओं को भी बधाई देना चाहता हूँ जिन्होंने श्री राहुल जी की एक आवाज पर ही ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन किये। कांग्रेस ने इस देश की संस्थाओं को बनाया, उन्हें स्वतंत्र और अधिकार संपन्न बनाया। पर बहुत दुख के साथ कहना पड़्ता है कि आज वो सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी है। BJP-RSS ये काम पूरी योजना के तहत कर रही है। हमारे सवाल इन संस्थाओं को कमजोर करने के इरादे से नहीं होते, हम तो चाहते हैं कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्ता पक्ष और विपक्ष – दोनों उसके निर्णयों पर समान भरोसा करें।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है। लेकिन क्या ये पूछना ग़लत है कि SIR का फैसला किसने लिया?
क्या ये पूछना ग़लत है कि दो चुनाव आयुक्तों को Internal Portal से बाहर क्यों रखा गया? क्या कुछ गोपनीय चल रहा था?
DELHI : डॉ. निशा कुमारी

