दिल्ली / पटना :
Chief Minister Nitish Kumar will visit Delhi on April 10.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। नीतीश कुमार ने 26 मार्च को अपनी समृद्धि यात्रा का समापन नालंदा और पटना दौरे के साथ कर दिया है। अब राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्हें अगले महीने की दस तारीख तक सदस्य के रूप में शपथ लेनी है। हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के कारण संवैधानिक बाध्यता है।इसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। 14 अप्रैल के बाद नई सरकार को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। तब तक सस्पेंस और अटकलों का दौर जारी रहेगा।
सूत्रों के अनुसार 30 मार्च को वह विधान परिषद सदस्यता छोड़ेंगे। इससे उनके अगले कदम की टाइमलाइन लगभग तय मानी जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत यह नियम लागू होता है। किसी भी व्यक्ति को एक साथ दो सदनों की सदस्यता नहीं दी जाती। राज्यसभा के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर एक पद छोड़ना जरूरी है।नीतीश कुमार के लिए यह समय सीमा 30 मार्च तक है। नीतीश कुमार का राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा। उम्मीद है कि वे इसी दौरान शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद उनका दिल्ली जाना भी तय माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बाध्यता नहीं है। वे चाहें तो कुछ समय तक पद पर बने रह सकते हैं।
खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इसके बाद नई सरकार के गठन की संभावना जताई जा रही है। तब तक सस्पेंस बरकरार रह सकता है। नीतीश कुमार का विधान परिषद में लंबा अनुभव रहा है। पहली बार 2006 से 2012 तक सदस्य रहे। इसके बाद 2012 से 2018 और 2018 से 2024 तक कार्यकाल रहा। मार्च 2024 में वे चौथी बार सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल 2030 तक निर्धारित था।लेकिन अब राज्यसभा जाने के कारण यह कार्यकाल खत्म हो रहा है।
क्या है संवैधानिक नियम ?
संविधान के अनुसार राज्यसभा सदस्य बनने पर 14 दिन में राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है। इस हिसाब से उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हालांकि एक सांसद मुख्यमंत्री रह सकता है। लेकिन इसके लिए 6 महीने के भीतर राज्य की सदस्यता लेना जरूरी है। यानी संवैधानिक रास्ता पूरी तरह खुला हुआ है। फैसला पूरी तरह राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।
नीतीश कुमार ने बेटे निशांत को सौंपा जिम्मेवारी
बिहार की सत्ता बीजेपी को सौपने से पहले नीतीश कुमार , बिहार की राजनीति में पार्टी और सरकार कैसे चले , इसके लिए सब रणनीति को सेट कर रहे हैं। जद यू की कमान अब लगभग निशांत के जिम्मे आ गयी है। नयी टीम बना दी गयी है। निशांत पुराने नेता बिजेंद्र यादव , श्रवण कुमार से लेकर नयी टीम के साथ लगातार मिल रहे हैं। नीतीश कुमार से अलग कमरे में मुलाकात करके सियासी दांव पेंच सिख रहे हैं। नीतीश कुमार करीबी जानकर बताते हैं कि बिहार छोड़ने के लिए ब्रेन वाश करने वाले संजय झा , ललन सिंह अशोक चौधरी , श्रवण कुमार पर अब नीतीश कुमार की नजर है। नीतीश कुमार ये जानते हैं कि ये लोग बीजेपी से मिलकर अपना हिट साधने में जुटे हैं , यही वजह है कि निशांत को पार्टी में लाकर इन नेताओं के अगले कदम पर ब्रेक लगा दिया गया है।
निशांत के नयी सरकार में भूमिका को लेकर क्या है रणनीति
निशांत कुमार अब जदयू के साथ – साथ नयी सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखेंगे। नीतीश कुमार अपने बेटे को आगे करके सभी विरोधियों को परदे के पीछे से देखेंगे। नयी सरकार में बीजेपी से मुख्यमंत्री होंगे तो, उपमुख्यमंत्री निशांत कुमार होंगें ? अभी सिर्फ कयास लगा सकते हैं।
आनंद मोहन ने कहा ठीक नहीं
पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन ने नीतीश कुमार को बिहार छोड़ने को गलत डिसिशन बताया। उन्होंने कहा की बीजेपी कि सियासी छल ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए वाद्य किया है। आनंद मोहन ने कहा कि बीजेपी को नीतीश कुमार के बगैर सत्ता चलाने में काफी दिक्कत होगी। नीतीश कुमार से जुड़े सवर्ण , अति पिछड़ा , दलित , मुस्लिम वोट बीजेपी से नाराज होकर तेजस्वी यादव की तरफ जा सकता है । बीजेपी ने चुनाव के तीन महीने के बाद नीतीश को इस्तीफा करवाकर अपने पैर पर कुलहरि मारने का काम करेगी।

