पटना :विशेष संवाददाता
Bihar Chief Minister’s residence at 1 Anne Marg has been renamed and will now be known as ‘Lok Sevak Awas’
बिहार में सत्ता हस्तांतरण के बाद अब बीजेपी के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। पूर्व के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान लिए गए कोई भी फैसले को अभी बदल नहीं रहे हैं। लेकिन नए फैसले अब लिए जा रहे हैं। अभी कैबिनेट का विस्तार 7 मई को होना है। इसके पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कई फैसले ले रहे हैं। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग का नाम बदलकर ‘लोक सेवक आवास’ कर दिया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक आदेश जारी किया है।
मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री आवास के रूप में आवास संख्या 1 अण्णे मार्ग, पटना आवंटित किया गया है। आवास संख्या 1 अण्णे मार्ग, पटना (मुख्यमंत्री आवास) को सभी आधिकारिक उद्देश्यों के लिये तत्काल प्रभाव से ‘लोक सेवक आवास’, अण्णे मार्ग, पटना के रूप में नामित किया गया है।
एक अणे मार्ग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी (मुख्यमंत्री का कार्यकाल ) भी अपने परिवार के साथ लगातार 15 वर्षों तक रहे थे। नीतीश कुमार लगभग 20 वर्षों तक (अप्रैल 2006 से मई 2026 तक) रहे। उन्होंने 2006 में आवास संभाला था, और 2014-2015 में कुछ महीनों के अंतराल को छोड़कर वे लगातार यहां रहे। उन्होंने 1 मई 2026 को यह आवास खाली कर दिया। अब नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास में शिफ्ट हो गए हैं।
लालू प्रसाद यादव ने 1990 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बंगले को आधिकारिक निवास के रूप में स्थापित किया था। लालू-राबड़ी का परिवार यहां लगातार 15 वर्षों (1990 से 2005 तक) रहा। कुल मिलकर देखें तो लालू-राबड़ी 15 साल और नीतीश कुमार लगभग 20 साल (2026 तक) 1 अणे मार्ग में रहे।
जानिए 1 अण्णे मार्ग, पटना (मुख्यमंत्री आवास) का क्या है इतिहास
बिहार के आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास का नाम सर माधव श्रीहरि अणे के नाम पर रखा गया है। सर माधव श्रीहरि अणे बिहार के दूसरे राज्यपाल थे। आपको बता दें कि सर माधव श्रीहरि अणे महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके से थे। 1930 में उन्होंने विदर्भ में जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व किया। वे बाल गंगाधर तिलक के करीबी थे। बाल गंगाधर तिलक के होमरूल लीग का हिस्सा रहे, आजादी की लड़ाई में भी भाग लिया। उन्हें 1941 में वायसराय परिषद का सदस्य बनाया गया था, लेकिन गांधी जी के अनशन के दौरान सरकार के रवैये के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दरअसल, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब गांधी जी को आगा खां पैलेस में नजरबंद किया गया था. इस दौरान उन्होंने अनशन किया। तब अणे को लगा कि ब्रिटिश सरकार गांधी जी को मरने देने पर आमदा है, फिर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

