बिज़नेस डेस्क :
RBI MPC Meeting: Governor Malhotra holds repo rate at 5.50%; inflation forecast cut to 2.6%, GDP growth raised to 6.8%.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद आज घोषणा की गई कि ब्याज दरों (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी अगस्त 2025 के बाद अब अक्टूबर में भी रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत रखा गया है। लोन और EMI लेने वालों के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है , क्योंकि ब्याज दरें पहले जैसी ही रहेंगी।
इससे पहले रेपो रेट में इसी साल कटौती करते हुए 100 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की गई थी। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी की दरों में बदलाव से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है, जिससे केंद्रीय बैंक को अपनी भविष्य की मौद्रिक नीति तय करने में मदद मिलेगी। घरेलू स्तर पर जीएसटी रिफॉर्म और महंगाई नियंत्रण जैसे मुद्दे अहम हैं। ऐसे में भारतीय बाजार को उम्मीद थी कि आरबीआई इस बार सतर्क रुख अपनाएगा।
लोन और EMI लेने वालों के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है , क्योंकि ब्याज दरें पहले जैसी ही रहेंगी।
बैंकों के लिए भी उधारी की लागत में कोई बदलाव नहीं होगा। निवेशकों के लिए संकेत है कि आरबीआई फिलहाल स्थिरता बनाए रखना चाहता है और किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं है. इसका असर शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट और रुपये की चाल पर देखने को मिल सकता है। निवेशकों को राहत है कि लोन डिमांड बनी रहेगी। ब्याज दरें नहीं बढ़ीं, मतलब होम लोन और ऑटो लोन महंगे नहीं होंगे।
बता दें कि रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को शॉर्ट टर्म लोन देता है। रेपो दर में कटौती से बैंकों के लिए पैसा लेना सस्ता हो जाता है। इसके नतीजे में वे जनता को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। साल 2025 में रेपो रेट में 1% की कटौती हुई है। फरवरी, अप्रैल और जून में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स (1 फीसदी) की तीन कटौतियों के बाद रेपो रेट में लगातार दूसरी बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई ने स्टैंडर्ड डिपॉजिट फैसिटी (एसडीएफ) रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा है। वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) रेट 5.75% होगी।


Aam logon ko rahat nahi