अमित शाह की उपस्थिति में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे पर बनी सहमति ,मुख्यमंत्री सम्राट ,हेमंत भी रहे मौजूद

दिल्ली : 26 वर्षों का लंबित विवाद समाप्त, बिहार -झारखण्ड के हित में ऐतिहासिक समाधान।

Bihar and Jharkhand signed a historic Memorandum of Understanding (MoU) on August 31, 2026, in New Delhi to resolve their 26-year-old Son (Sone) River water-sharing dispute

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव और भारत सरकार और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस समझौता से बिहार के किसानों को सिंचाई के लिए अधिक जल उपलब्ध होगा, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा और कृषि के साथ बिहार के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

जल विवाद पर समझौता से दोनों प्रदेशों का भला होगा – अमित शाह

Bihar and Jharkhand signed a historic Memorandum of Understanding (MoU) on August 31, 2026, in New Delhi to resolve their 26-year-old Son (Sone) River water-sharing dispute
Bihar and Jharkhand signed a historic Memorandum of Understanding (MoU) on August 31, 2026, in New Delhi to resolve their 26-year-old Son (Sone) River water-sharing dispute

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा। अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा की गई Team Bharat की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें, तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके। श्री शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है।

दक्षिण बिहार और झारखंड के सूखा प्रभावित एवं पठारी क्षेत्रों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक विकास को बल मिलेगा।

सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना और जलाशय निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ेगा, गयाजी सहित कई क्षेत्रों को होगा लाभ।

अमित शाह ने कहा कि आज के समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा। इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सक्रिय प्रयास, निरंतर संवाद और प्रभावी मध्यस्थता के कारण वर्षों से लंबित एवं जटिल विषय का समाधान संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि यह केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच सहयोग, विश्वास और साझा विकास का नया अध्याय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते के तहत सोन नद के कुल 14.25 मिलियन एकड़ फीट (एम०ए०एफ०) जल में से मध्य प्रदेश को 5.25 एम०ए०एफ०, उत्तर प्रदेश को 1.25 एम०ए०एफ० तथा तत्कालीन अविभाजित बिहार को 7.75 एम०ए०एफ० जल आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद अविभाजित बिहार के हिस्से के 7.75 एम०ए०एफ० जल के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जो पिछले 25 वर्षों से लंबित था। उन्होंने कहा कि 10 जुलाई 2025 को रांची में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में इस विषय पर महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई और तकनीकी विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप आज इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए समझौते के तहत बिहार को 5.75 एम०ए०एफ० तथा झारखंड को 2.00 एम०ए०एफ० सोन नद का जल आवंटित करने पर औपचारिक सहमति बनी है, इससे विशेष रूप से दक्षिण बिहार और झारखंड के पठारी एवं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर होगी। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, पेयजल संकट कम होगा तथा औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही दोनों राज्यों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद सोन नद के जल के बेहतर उपयोग के लिए जलाशय निर्माण तथा सोन नद को फल्गु नदी से जोड़ने की प्रस्तावित परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा सकेगा, इससे गयाजी सहित दक्षिण बिहार के कई क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ेगी। फल्गु नदी में पर्याप्त जल रहने से पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को तर्पण एवं पिंडदान में भी सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन नद गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी है और इसका जलग्रहण क्षेत्र पूर्वी भारत की कृषि एवं आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह समझौता केवल बिहार और झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वी भारत के जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के लिए दूरगामी महत्व रखता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक समाधान के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय, झारखंड सरकार तथा इस प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद की भावना से ही ऐसे जटिल अंतर्राज्यीय विषयों का स्थायी समाधान संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता आने वाले वर्षों में किसानों, आम नागरिकों और भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा

अब तक हो चुके हैं चार ऐतिहासिक समझौते

गृह मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं। 07 जुलाई, 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है।
29 जून, 2026 को श्री अमित शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा।

16 जून, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए। किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।

दिल्ली : किशोर कुमार सिंह

 

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