मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने राज्यसभा सदस्य, 14 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा करेंगे !

JDU reshuffles national team, no party post for Nitish Kumar's son Nishant

दिल्ली : विशेष संवाददाता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ले ली है। लालू यादव, सुशील मोदी के बाद नीतीश कुमार अब चारों सदनों यानि बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपना नाम भी दर्ज करा लिया है। आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने कहा है कि संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं।

सूत्रों के मुताबिक हो सकता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके लिए कोई बड़ी जिम्मेदारी तय कर रखी हो। अगर ऐसा हो जाता है तो नीतीश कुमार तीन प्रधामंत्रियों के साथ काम करने वालों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। नीतीश कुमार लोकसभा सांसद रहते हुए विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि नीतीश कुमार को शायद उप प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का पद मिल सकता है।

इसके पहले 9 अप्रैल को दिल्ली पहुंचे उन्होंने कहा कि मैंने बिहार में बहुत काम किया है। अब मुझे लगा कि मुझे यहां रहना चाहिए और मैं यही कर रहा हूं। नीतीश कुमार ने कहा है मैं वहां अपने पद से हट जाऊंगा और यहां काम करूंगा। मैं तीन या चार दिनों में इस्तीफा दे दूंगा। नए लोगों को मुख्यमंत्री और मंत्री बनाया जाएगा। नीतीश कुमार के साथ जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद थे।

बिहार में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया 13 अप्रैल के बाद शुरू होगी। नयी सरकार के नए मुख्यमंत्री संभवतः 15 अप्रैल को शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह सहित कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता उपस्थित रहेंगे। बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है।

नीतीश कुमार साल 2005 में लोकसभा सांसद पद से इस्तीफा देकर बिहार के सीएम बने थे, लेकिन अब फिर से राज्यसभा सदस्य बनकर केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं। 2005 से लेकर 20 साल तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। हालांकि उन्होंने एक बार जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री भी बनाया, लेकिन बदले माहौल के कारण उन्हें हटाकर फिर से मुख्यमंत्री बने। इस बीच करीब डेढ़ साल लालू यादव के साथ मिलकर सरकार भी चलाया।

नीतीश कुमार से पहले लालू यादव के अलावा बिहार में दिवंगत बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी के नाम भी चारों सदनों का सदस्य होने का रिकॉर्ड है। पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम चारों सदनों का रिकॉर्ड है। लालू यादव बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे हैं।

Jetline

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