सांसद पप्पू यादव को धोखाधड़ी से मकान पर कब्जा करने के मामले में पटना कोर्ट से जमानत मिली

pappu Yadav gets bail from mp mla-court patna bihar was arrested in 31-year-old-case

पटना : उमेश नारायण मिश्रा

pappu Yadav gets bail from mp mla-court patna bihar was arrested in 31-year-old-case.

पूर्णियां के सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेने और कब्जा करने के मामले में पटना के कोर्ट से जमानत मिल गयी है। 6 फरवरी की देर रात पप्पू यादव को 1995 के एक पुराने मामले में पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। अभी वे न्यायिक हिरासत में बेउर जेल में थे।

मकान मालिक बी बी लाल ने गर्दनीबाग थाने में केस किया था। हालांकि कोर्ट में लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद पप्पू यादव ने कब्ज़ा किया हुआ मकान को छोड़ दिया था। मकान मालिक बी बी लाल की मौत हो चुकी है। मामला वर्ष 1995 का है, जब पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने धोखाधड़ी कर उनका मकान किराए पर लिया और बाद में उस मकान का इस्तेमाल सांसद कार्यालय के रूप में किया गया. आरोप है कि किराए पर लेते समय इस बात को छिपाया गया था। पटना की एमपी-एमएलए अदालत ने पप्पू यादव समेत तीन लोगों के खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया था। यह आदेश लंबे समय तक अदालत में पेश न होने के कारण दिया गया था।

जानिए किस केस में हुई थी गिरफ्तारी

जिस केस में पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया था , वो केस पटना के शास्त्री नगर सहायक थाना (गर्दनीबाग थाना) में 31 साल पहले 1995 में दर्ज किया गया था। पटना के पुनाईचक मोहल्ला में रहने वाले रिटायर्ड इंजीनियर विनोद बिहारी लाल ने धोखाधड़ी से मकान पर कब्जा करने के खिलाफ दर्ज कराया था, जिसका एफआईआर नम्बर 552/1995 और GR नम्बर 775/03 है। केस में 30 अप्रैल 1996 को ही पटना की निचली अदालत ने संज्ञान लिया था। चार्ज फ़्रेम 11 सितम्बर 1998 को ही हो गया था, लेकिन बार-बार बुलाने के बाद भी राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और दो अन्य अभियुक्त कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे। एफआईआर में मकान मालिक वी बी लाल ने पप्पू यादव पर आरोप लगाया था कि पप्पू यादव 1994 में जब पहली बार सांसद बने थे, तब इन्होंने पटना में अपना निजी ऑफिस बनाने के लिए उनका पुनाईचक स्थित दो तल्ले का मकान के नीचे का भाग किराए पर धोखा करके लिया था। मकान मालिक ने साफ-साफ एफआईआर में लिखा था और कोर्ट में गवाही के दौरान कहा था कि हमने अपना मकान पप्पू यादव को किराये पर रहने के लिए नहीं दिया था। वी बी लाल ने यह भी बताया था कि आर आर इंटरप्राईजेज एक निजी कंपनी के ऑफिस के लिए उनसे एग्रीमेंट के लिए दिया गया था, लेकिन धोखे से इसमें पप्पू यादव ने ऑफिस बना लिया। मकान मालिक ने कोर्ट में यह साफ आरोप लगाया कि चंद्र नारायण यादव ने आर आर इंटरप्राईजेज के नाम से किराया लिया था। इसके बाद एक दिन अचानक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पूरे दल-बल के साथ पहुंचकर अपना अड्डा बना लिया और अपना निजी कार्यालय बना लिया। मकान मालिक ने जब किरायेदार चंद्र नारायण यादव से पूछा कि पप्पू यादव हमारे मकान में क्यों आए हैं तो उन्होंने कहा कि पप्पू यादव मेरा बेटा है और एक पिता के घर में बेटा को रहने का अधिकार है और आर आर कंपनी की बात थी, उसका पूरा नाम राजेश रंजन इंटरप्राईजेज है, यानी पप्पू यादव के नाम से ही यह कंपनी रजिस्टर्ड है और कंपनी का एक डाईरेक्टर चंद्र नारायण यादव भी थे। इसके बाद मकान मालिक ने धोखाधड़ी का केस पटना के शास्त्रीनगर थाना में दर्ज किया था। पप्पू यादव के पिता चंद्र नारायण यादव की मृत्यु हो चुकी है।

मकान मालिक ने आरोप में कहा कि उनको न तो एग्रीमेंट के अनुसार किराया दिया गया और न ही कहने पर मकान खाली किया, उल्टे पप्पू यादव ने उन्हें धमका दिया, जिससे वे मजबूर होकर बगल के किराये के मकान में डर के साये में रह रहे थे। उस समय बिहार में लालू यादव का राज था, जहां बाहुबलियों द्वारा मकान पर कब्जा करना आम बात था और उस समय बिहार में यह केस काफी चर्चित भी रहा था। यह एफआईआर मीडिया ट्रायल के बाद दबाव में पटना के शास्त्रीनगर थाना में दर्ज किया गया था, जहां के इंस्पेक्टर शिव शंकर यादव (अब दिवंगत) थे, जो लालू यादव के बेहद करीबी थे। इस केस में पप्पू यादव के अलावा दो और लोगों का भी नाम है जो मकान किराए पर लेने गए थे, अदालत ने आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इस मामले में जब पप्पू यादव कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तब अदालत ने उनकी संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश पारित कर दिया, तब जाकर मकान को पप्पू यादव ने खाली किया था। यह मकान काफी चर्चित रहा था, क्योंकि इसमें पहले कस्टम विभाग का कार्यालय था।

Jetline

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