बिहार में जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, विशेषज्ञों के सुझाव और केंद्र सरकार के सहयोग से विकास की नई ऊंचाइयां हासिल की जाएगी। बिहार और झारखंड के बीच 25 वर्षों से लंबित सोन नदी जल विवाद का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सहयोग से समाधान हुआ, जिसके तहत अब बिहार को तीन-चौथाई जल प्राप्त होगा। बिहार में गाद प्रबंधन (Silt Management) की राज्यस्तरीय नीति बनाई गई है।
पटना, 30 अक्टूबर 2026 :
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के चाणक्या होटल में ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ विषय पर जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार कार्यक्रम में शामिल हुये। सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की नदियां, जल संसाधन और यहां की आबादी को राज्य की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत बनाना है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलने में सफल रहे, तो बिहार को समृद्ध राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि बिहार के समग्र विकास, कृषि के विस्तार और औद्योगिक प्रगति के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। राज्य को पीने के पानी, किसानों के खेतों की सिंचाई और उद्योगों के संचालन के लिए पानी चाहिए। गंगा जल एवं फरक्का समझौते से जुड़े विषयों में बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे का लगभग 25 वर्षों से लंबित विवाद माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के सहयोग से सुलझाया गया है, इसके तहत बिहार को तीन-चौथाई (3/4) पानी प्राप्त होगा। यह राज्य के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गाद प्रबंधन (Silt Management) को लेकर राज्यस्तरीय नीति बनाई है। गंगा सहित अन्य नदियों से निकलनेवाली गाद का वैज्ञानिक तरीके से निष्कासन और उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। गंगा की गाद एवं मिट्टी को आम लोगों के उपयोग तथा सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए आने वाले समय में बिहार सरकार और NHAI के बीच समझौता किया जाएगा। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर भी गाद प्रबंधन की एक ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने गंगा के तटबंधों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि नदी के प्रवाह और उसके प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से समझना और उसके अनुरूप कार्य करना जरूरी है। संगोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों को गंगा का हवाई सर्वेक्षण (Aerial Survey) कराया जाए, ताकि वे नदी की वास्तविक स्थिति, प्रवाह और गाद जमाव का प्रत्यक्ष आकलन कर सकें तथा प्रभावी सुझाव दे सकें। उन्होंने कहा कि बिहार की नदियां राज्य के लिए अपार संभावनाओं का स्रोत हैं। इनके जल और गाद का समुचित प्रबंधन कर कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य एक करोड़ लोगों के लिए रोजगार एवं नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प बिहार की नदियों को राज्य की आर्थिक समृद्धि का आधार बनाना है। जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, विशेषज्ञों के सुझाव और केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चन्द्रशेखर सिंह ने हरित पौधा, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने जल सुरक्षा को लेकर तैयार की गयी एक स्मारिका का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान बाढ़, जल प्रबंधन पर आधारित एक लघु फिल्म दिखायी गयी। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, सांसद संजय कुमार झा ने भी संबोधित किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चन्द्रशेखर सिंह, विभिन्न क्षेत्रों से आये हुए जल विशेषज्ञ, अभियंतागण, वरीय अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।






