खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति, नई प्रश्नावली के साथ हो जाति जनगणना

खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति, नई प्रश्नावली के साथ हो जाति जनगणना।

Kharge, Rahul Gandhi write to PM Modi on caste census: The Congress has rejected the current census format notified by the Union Home Ministry on August 14, calling it deceit and betrayal.Congress president Mallikarjun Kharge and Leader of Opposition in the Lok Sabha Rahul Gandhi have written to Prime Minister Narendra Modi, demanding that the methodology adopted by the Bihar and Telangana governments be applied at the national level.

कांग्रेस ने मोदी सरकार द्वारा अधिसूचित जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे खारिज कर दिया है। पार्टी ने मांग की है कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति के अनुसार जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार कर देशभर में जातिगत जनगणना कराई जाए। पार्टी ने नई प्रश्नावली के लिए राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक परामर्श करने की भी मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र भेजकर कहा है कि ‘ओपन-एंडेड’ सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े व वंचित समुदायों को होगा। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने यह जानकारी दी। इस दौरान उनके साथ ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद भी मौजूद थे।

जयराम रमेश ने बताया कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को लिखे इस पत्र में जातिगत जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र में यह मांग की गई है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने। इसके अलावा दोनों नेताओं ने यह भी कहा है कि तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों की तरह पहले से तैयार एवं प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना इसका व्यावहारिक समाधान है। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि यह कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री को लिखा गया तीसरा पत्र है। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अप्रैल 2023 को पहला पत्र और 5 मई 2025 को रचनात्मक सुझावों के साथ दूसरा पत्र लिखा था, लेकिन इन दोनों ही पत्रों का सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

कांग्रेस महासचिव ने याद दिलाया कि 2023 और 2024 के चुनावों के समय जब कांग्रेस ने जातिगत जनगणना की मांग की थी, तब प्रधानमंत्री ने इसे ‘अर्बन नक्सल’ सोच बताया था। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री ने यूटर्न लेते हुए 2027 में जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया और अब सरकार इसके प्रारूप को लेकर फिर से नया यूटर्न ले रही है।जयराम रमेश ने बताया कि बीती 14 अगस्त को जारी अधिसूचना में 40 सवाल हैं और दसवें प्रश्न से ही स्पष्ट हो जाता है कि मोदी सरकार ईमानदारी से जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जानबूझकर इसे ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दायर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि उसमें स्वयं सरकार ने स्वीकार किया था कि जातिगत जनगणना के लिए पहले से जातियों की सूची तैयार होना आवश्यक है।

खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति, नई प्रश्नावली के साथ हो जाति जनगणना।

खरगे और राहुल गांधी के पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भारत में एक ही जाति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है। ऐसे में यदि जातिगत जनगणना कर रहे गणनाकारों के पास पहले से प्रमाणित जातियों की सूची नहीं होगी तो एक ही जाति के कई नाम दर्ज हो जाएंगे, इससे प्रक्रिया में गंभीर खामियां आएंगी। उन्होंने कहा कि देश में जातियों के अलग-अलग दर्ज होने से आंकड़ों में बड़ी विसंगतियां पैदा होंगी और पूरी प्रक्रिया से प्राप्त आंकड़े ही अनुपयोगी हो जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब किसी समुदाय की सही संख्या ही सामने नहीं आएगी, तो उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन भी संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा प्रारूप से देश में ओबीसी की आबादी का सही आंकड़ा सामने नहीं आएगा, क्योंकि प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं है।

उन्होंने मांग की कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक विचार-विमर्श के बाद नई प्रश्नावली तैयार की जाए, ताकि प्रत्येक जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आ सके तथा जाति जनगणना सटीक, सार्थक व सामाजिक न्याय के लिए उपयोगी साबित हो।उन्होंने कहा कि अभी जातिगत जनगणना जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में शुरू हुई है और फरवरी 2027 से इसे पूरे देश में शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी भी प्रारूप में आवश्यक सुधार करने का समय है।

जयराम रमेश यह भी बताया कि देश में लगभग 4,200 जातियां हैं, केंद्र व राज्यों सरकारों के पास पहले से ही इनकी सूचियां उपलब्ध हैं। इसलिए यह कहना गलत है कि ऐसी प्रमाणित सूची तैयार करना या उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण का मूल आधार जातिगत आंकड़े हैं, इसलिए जातिगत जनगणना भी सही तरीके से कराई जानी चाहिए।

Jetline

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *