नीतीश कुमार सभी सांसदों,विधायकों, विधान पार्षदों,और मंत्रियों के साथ 18 सितम्बर को पटना में करेंगे बैठक , क्या बिहार में फिर कुछ बड़ा होने वाला है ?

JDU calls All MP MLA MLC meeting Farakka water treaty UCC ANN UCC

JDU calls All MP MLA MLC meeting Farakka water treaty UCC ANN UCC.

JDU ने 18 सितंबर को पटना में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में नीतीश कुमार ने पार्टी के सभी सांसदों , विधायकों , विधान पार्षदों और मंत्रियों को शामिल होने के लिए कहा है। इस बैठक को बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और एनडीए में रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। मीटिंग में शामिल होने के लिए संजय झा , ललन सिंह से लेकर बड़े नेता पटना में कैंप किये हुए हैं। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू किया जाएगा। इस मामले के आने के बाद बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी में हलचल तेज है। दरअसल नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं हैं और मुख्यमंत्री पद बीजेपी के सम्राट चौधरी के पास है. ऐसे में जदयू के सामने बिहार के मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और सहयोगी दल के साथ संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है।

ये बैठक इसलिए भी खास है, कारण कि जल्द ही मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होना है। बिहार से जद यू कोटे से ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर केंद्रीय मंत्री हैं। इस बार के विस्तार में जद यू की तरफ से कम से कम एक और मंत्री बनने की बात सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार मंत्री रामनाथ ठाकुर को रिप्लेस किया जा सकता है।

बिहार की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। जेडीयू विधान मंडल की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से मिलने उनके पटना स्थित आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान ललन सिंह के आवास पर पार्टी के कोषाध्यक्ष ललन सर्राफ भी मौजूद रहे। हाल के दिनों में राज्य में घटे राजनीतिक घटनाक्रमों पर ललन सिंह की खामोशी के बीच इस मुलाकात ने कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। यूसीसी और फरक्का जलसंधि जैसे मुद्दों पर पार्टी के रुख के बीच ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

बिहार में जदयू यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बीजेपी के साथ नहीं

UCC पर जेडीयू ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक यूसीसी के प्रावधान सामने नहीं आते, तब तक अंतिम फैसला नहीं होगा। ड्राफ्ट देखने के बाद ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जाएगी और गठबंधन के तहत निर्णय लिया जाएगा।

बिहार में सत्ता समीकरण बदलने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के सामने अब सिर्फ सरकार में रहने और इसे चलाने भर की चुनौती नहीं है, बल्कि अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखने का है। बीजेपी बिहार में भीतर से ऑपरेशन लोटस को चला रही है। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह के एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू करने के बयान ने बिहार की राजनीति को गर्म कर दी है। बिहार में जदयू यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बीजेपी के साथ नहीं दिख रही है। इधर राजद ने जद यू को बीजेपी से हटने और राजद के साथ आने का ऑफर दे दिया है। तो क्या बिहार में फिर खेला होने वाला है ?

#UCC in Bihar: यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी पर बिहार एनडीए में शुरू हुई बयानबाजी अब जेडीयू की राजनीतिक रणनीति के लिए बड़ा सवाल बन गया है। सबसे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने की बात कही, लेकिन इसके बाद उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि पार्टी जद यू कानून के प्रावधानों को देखने के बाद अपना रुख तय कर सकती है। इसी बीच नीतीश कुमार ने 18 सितंबर को JDU के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई है।

इस बैठक में UCC के साथ फरक्का जल संधि जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि जदयू को तय करना है कि एनडीए के भीतर रहते हुए बिहार के सवालों पर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक लाइन कैसे रखने वाले हैं। संजय झा की अमित शाह से प्रस्तावित मुलाकात और इस बैठक को साथ रखकर देखें तो सवाल सिर्फ यूसीसी का नहीं, बल्कि यह भी है कि मुख्यमंत्री (नीतीश) की कुर्सी से बाहर आने के बाद जेडीयू बिहार के मुद्दों पर अपनी अलग राजनीतिक आवाज किस तरह कायम रखेगी?

जानिये क्या है बैठक क मुख्य एजेंडा

समान नागरिक संहिता (UCC): एनडीए के भीतर यूसीसी पर चर्चा और इसके प्रावधानों के ड्राफ्ट को लेकर पार्टी अपना स्वतंत्र रुख साफ कर सकती है।
पार्टी का नाम बदलने की चर्चा: राजनीतिक गलियारों में जेडीयू का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ या ‘जेडीएन’ करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा और सदस्यों की राय ली जा सकती है।

फरक्का जल संधि: बिहार के हितों से जुड़े फरक्का जल संधि के मुद्दे पर भी मंथन संभावित है।

विधायकों का प्रशिक्षण: पार्टी के नवनिर्वाचित और मौजूदा विधायकों के लिए विधायी कार्यों (प्रश्नकाल, ध्यान आकर्षण आदि) से जुड़ा एक प्रबोधन या प्रशिक्षण कार्यक्रम भी रखा गया है।

पटना : उमेश नारायण मिश्रा

Jetline

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