Facebook and Instagram are now ban for children under 16, making them the first country in the world to take action for children
शार्प वे न्यूज नेटवर्क :
बच्चों को ऑनलाइन खतरों और सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए और डिजिटल दुनिया से दूर करने के लिए आज से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम सहित टिकटॉक, स्नैपचैट, यूट्यूब, X, थ्रेड्स, रेडिट और किक जैसे कई सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया गया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट, यूट्यूब, फेसबुक और X, थ्रेड्स, रेडिट और किक जैसे प्लेटफॉर्म अब नाबालिगों के लिए बंद हो गये हैं। इन सभी प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चों को अपने ऐप्स से दूर रखें और अगर ये प्लेटफॉर्मस ऐसा नहीं कर पाए, तो उन्हें $49.5 मिलियन (करीब 400 करोड़ रुपए) का जुर्माना भरना पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 5 लाख अकाउंट्स को आज यानी 10 दिसंबर तक लॉक कर दिया गया है। हालांकि, यूट्यूब और रेडिट पर बच्चे वीडियो देख सकेंगे, लेकिन अकाउंट न बनाकर कमेंट या पोस्ट न कर सकेंगे। बच्चों के लिए यह कदम उठानेवाला दुनिया का पहला देश ऑस्ट्रेलिया है। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों का Facebook-Insta बैन के इस फैसले ने पूरे देश में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि यह बच्चों के लिए एक बड़ा और जरूरी कदम है तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसका विरोध करते हुए इसे बच्चों की स्वतंत्रता का हनन मान रहे है।
16 साल से कम उम्र के बच्चों का Facebook-Insta बैन के फायदे-नुकसान
Australia’s Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन का एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे अब तक किसी देश ने इस पैमाने पर नहीं अपनाया था। यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। एक्सपर्ट्स मानना है कि यह कदम बच्चों के जीवन में सकारात्मक और दूरगामी बदलाव ला सकता है। सोशल मीडिया से दूरी बच्चों के दिमाग और भावनाओं को शांत करने में मदद कर सकती है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। तनाव और चिंता (Anxiety) में कमी आती है। स्क्रीन टाइम कम होने से बच्चे अपनी वास्तविक ज़िंदगी और दोस्तों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर पाएंगे, जिससे मानसिक तनाव कम होगा। बच्चों में बेहतर नींद और एकाग्रता आएगी। अच्छी नींद से स्कूल में उनका फोकस और एकाग्रता बढ़ेगी, जिससे उनके अकादमिक प्रदर्शन में बढ़ोतरी होगी। कम स्क्रीन टाइम का सीधा मतलब है शारीरिक गतिविधियों में वृद्धि, जो बच्चों के ग्रोथ के लिए ज़रूरी है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य सही रहेगा और बच्चे शारीरिक तौर पर मजबूत होंगे। बच्चों की आंखें भी स्कीन से होनेवाले नुकसान से बची रहेंगी और खेलकूद से उनका शारीरिक पोस्चर भी सुधरेगा।
बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन के साईड इफैक्टस
कुछ लोगों का मानना है कि कुछ बच्चों के लिए सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सीखने और जुड़ने का माध्यम भी है। बहुत से बच्चे ऑनलाइन आर्ट, म्यूजिक, भाषा और साइंस जैसी चीजें सीखते हैं और इस बैन से उनके लिए कुछ बेहतर सीखने के अवसर सीमित हो सकता है। इसके अलावा, उम्र की पहचान करने के लिए कड़े डिजिटल वेरिफिकेशन नियम लागू करने होंगे, जिससे बच्चों और बड़ों दोनों की प्राइवेसी पर खतरा हो सकता है। हो सकता है कि कुछ लोग इसके विरोध में उठ खड़े हो।
अभिभावकों को भी उठाने होंगे कदम
हालांकि जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए यह कदम उठाया है, अभिभावको का भी दायित्व बनता है कि वे अपने बच्चों के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठायें और बच्चों को सोशल मीडिया से दूरी बनाये रखने में मदद करें। माता-पिता को चाहिए कि वे इस खाली समय को सकारात्मक गतिविधियों से भरने के लिए प्रेरित करें, जैसे- बच्चों में किताबें पढ़ने या कहानी सुनने की आदत डलवायें, उनके साथ बोर्ड गेम्स खेलें, उन्हें खेल के मैदान या पार्क में ले जाएं और बच्चों में आत्मविश्वास जगाएं।
ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय दुनिया के लिए एक बड़ा प्रयोग है और इसका असर आने वाले सालों में ही पता चलेगा। यह बैन बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल भविष्य बनाएगा, या यह उनकी सीखने और अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित कर देगा। फिलहाल दुनिया की निगाहें ऑस्ट्रेलिया पर टिकी हैं और बहस का एक मुद्दा बन गया है।

