दिल्ली : डॉ. निशा सिंह
भारतीय रिज़र्व बैंक की (RBI)तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दिया है। इसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 फीसदी पर आ गया है। वर्ष 2025 में 4 बार रेपो रेट घटाया गया है।
RBI Repo Rate Cut, RBI MPC Meeting December 2025 : होम लोन और ऑटो लोन लेने वालों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने राहत भरी खबर दी है। बुधवार से शुरू तीन दिवसीय आरबीआई एमपीसी की बैठक में लिये गए फैसलों की जानकारी देते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा.ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ” अर्थव्यवस्था में मज़बूत वृद्धि और सौम्य मुद्रास्फीति देखी गई।” मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई ने इस साल रेपो रेट को घटाकर 5.25% कर दिया है। इस फैसले का सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, क्योंकि होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट लोन की EMI अब कम होगी। बैंकों से कर्ज लेने वालों को आने वाले महीनों में कम ब्याज देना होगा।
बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 की आरबीआई की यह पांचवीं बैठक है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब रुपया, इस हफ्ते अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, एक डॉलर ₹90 के स्तर को पार कर गया है। इस ताजा कटौती के बाद 20 साल के ₹20 लाख के लोन पर ईएमआई 310 रुपए तक घट जाएगी। इसी तरह ₹30 लाख के लोन पर ईएमआई 465 रुपए तक घट जाएगी। इसका फायदा नए और मौजूदा दोनों ग्राहकों को मिलेगा।
बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?
सवाल है कि आखिर रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? इसका जवाब है कि यह किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली उपकरण है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। जब पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है और डिमांड में कमी आती है, जिससे महंगाई घट जाती है।
इसी तरह से जब अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।
रेपो रेट के घटने से क्या होगा असर ?
रेपो रेट के घटने से हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर ब्याज दरें कम होते हैं। ब्याज दरें कम होने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ब्याज दरें घटने से ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर बूस्ट होगा।
इस साल 4 बार घटा रेपो रेट
RBI ने इस साल 4 बार घटा रेपो रेट घटाया है। सबसे पहले फरवरी में RBI ने ब्याज दरों में 0.25% की कटौती की और इसे को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। अब एक बार फिर इसमें 0.25% की कटौती की गई है। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1.25% घटाई। बता दें कि हर दो महीने में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग होती है। इस कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से तीन सदस्य RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।

