पटना :
Flood of Media in Bihar election 2025:
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मीडिया पर सोशल मीडिया भारी पड़ता नजर आ रहा है। चुनाव प्रचार के प्रसार में पार्टी के नेताजी इस बार पूरे दमखम से सोसाइल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। बीजेपी, कांग्रेस, राजद, जदयू, जन सुराज, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, लेफ्ट के प्रेस कांफ्रेंस में मेन स्ट्रीम की मीडिया (सेटेलाईट न्यूज़ चैनल, बड़े न्यूज़ पेपर, न्यूज़ एजेंसी) के प्रतिनिधि के अलावे सोशल मीडिया का माइक आईडी की बाढ़ दिख रही है। सवाल कौन पूछे, ये ठीक से पत्रकार पूछ नहीं पा रहे हैं। मेन स्ट्रीम की मीडिया में भ्रटाचार, पलायन, बेरोजगारी का मुद्दा रिसर्च के न छपती है न ही न्यूज़ चैनल पर दिखती है।
प्रशांत किशोर ने जिस प्रकार बिहार के मंत्री अशोक चौधरी, सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल के भ्रष्टाचार और फर्जी सर्टिफिकेट का मुद्दा उठाया, उससे तो यही लगा है कि ये काम तो मीडिया को पहले करनी चाहिए था। पटना में नेशनल चैनल के एक पत्रकार ने प्रशांत किशोर से पूछा- क्या अशोक चौधरी ने आपके खिलाफ दिया अपना 100 करोड़ के मान हानि की नोटिस को डील के तहत वापस लिया हैं ? इस पर प्रशांत किशोर ने कहा- आपके ऐसे नासमझ पत्रकार के कारण ही बिहार का हाल बेहाल है। दरसअल प्रशांत किशोर ने ये कहा है कि बिहार में लालू -नीतीश के पिछले 35 साल के राज-पथ में मीडिया स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है। यही वजह है कि मेन स्ट्रीम मीडिया से मुख्य ख़बरें गायब हो चुकी हैं।
टेलीविज़न, न्यूज़ पेपर, पत्रिका का दौर एक समय वोटरों तह पहुँच का साधन हुआ करता था। अब नए फॉर्मेट में सोशल मीडिया का जलवा है। हर घर, हर हाथ में मोबाइल है। कोई भी समाचार, वीडियो कंटेंट के साथ लोगों के हाथ में सीधे पहुँच रहा है। कोई भी वीडियो वायरल होकर नेशनल मीडिया में छाया रहता है। कल तक जिसे कोई मीडिया तरजीह नहीं देता था, वो सोसाइल मीडिया पर अब उपलब्ध हो जाता है।
बिहार चुनाव में भी इस बार मेन स्ट्रीम की मीडिया इंडस्ट्री भी अपना काम कर रही है। प्रचार-प्रसार के लिए पटना से लेकर बिहार के जिलों में टीवी चैनल का राजनीतिक इवेंट्स वोटरों को प्रभावित करने में लगी है। इसके बीच सोशल मीडिया (यू ट्यूव चैनल, फेस बुक, इंस्टाग्राम) का माइक आईडी कुकुरमुत्ते की तरह पूरी तरह एक्टिव है। प्रचार के दौरान जहाँ भी नेताओं का प्रोग्राम या प्रेस कांफ्रेंस होता है, सेंकड़ो माइक आईडी लेकर उनके प्रतिनिधि रेलमपेल कर रहे हैं। यहाँ पर मीडिया के लोग आपस में झगड़ते दिख रहे हैं। पार्टियां और नेताजी भी ऐसे सोशल मीडिया का सहारा लेकर वोटरों तक अपनी बात को पहुंचा रहे हैं। दरअसल टी वी इंडस्ट्री पर नेताओं पर आधारित राजनीतिक डिबेट ने मीडिया की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। फुहर शब्दों, गली गलौज, आरोप-प्रत्यारोप, कमेंट को देखकर आम लोग अब अपने घर में न्यूज़ चैनल देखना नहीं चाहते हैं। देश की ख़बरें टेलीविज़न से गायब हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया, मुख्य स्ट्रीम मीडिया पर भारी दिख रहा है।
न्यूज़ चैनल और न्यूज़ पेपर में चुनाव प्रचार पर पार्टियां और नेताजी का खर्च होता है। चुनाव आयोग के सख्ती के कारण अब प्रचार-प्रसार पर खर्च काम हो रहा है। सोशल मीडिया का अभी जमाना है, सो नेताजी कम पैसे और संसाधन में वोटरों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बीच अब ये सवाल मीडिया इंडस्ट्री पर उठ खड़ा हुआ है। क्या मीडिया पर भरोसा बस अब खत्म होने के कगार पर है ?
बिहार में दो चरणों में चुनाव होंगे। 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी और 14 नवंबर को मतगणना होगी।
पहले फेज में 18 जिलों में इन 121 सीटों पर मतदान:
पहले चरण में गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, खगड़िया, बेगुसराय, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर यानी 18 जिलों में वोटिंग होगी।
दूसरे फेज में कुल 20 जिलों में इन 122 सीटों पर मतदान:
दूसरे फेज में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया,कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद,अरवल, रोहतास, कैमूर यानी कुल 20 जिलों में मतदान होगा।

