बिहार चुनाव: सहरसा विधानसभा सीट : जन सुराज के प्रत्याशी किशोर कुमार मुन्ना के इंट्री से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ेगी

Saharsa Assembly Seat The entry of Jan Suraaj candidate Kishore Kumar Munna is likely to lead to a triangular contest

सहरसा : प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना को सहरसा विधान सभा से अपना प्रत्‍याशी बनाया है। किशोर कुमार मुन्ना सोनबरसा के पूर्व विधायक हैं। इस सीट पर बीजेपी ने सिटिंग विधायक अलोक रंजन को टिकट लगभग फाइनल किया है। महागठबंधन से नाम अभी फाइनल नहीं हुआ है। इस क्षेत्र से विधान पार्षद राजद के अजय सिंह। किशोर मुन्ना के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। 2020 विधान सभा चुनाव में किशोर कुमार मुन्ना निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में सहरसा विधान सभा से उतरे थे, लेकिंन हार का सामना करना पड़ा। 2020 विधान सभा चुनाव में बीजेपी के अलोक रंजन को 103538 वोट मिले यानि 46.68 प्रतिशत वोट मिला। दूसरे स्थान पर महागठबंधन के प्रत्याशी लवली आनंद रहीं, जिनको 83859 वोट मिला यानि
37.81 प्रतिशत। इस मुकाबले में किशोर मुन्ना को मात्र 12592 वोट मिला यानि 5.68 प्रतिशत। एक बार से फिर से किशोर कुमार मुन्‍ना सहरसा से जन सुराज पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं।

वर्तमान में जन सुराज राज्य चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष किशोर कुमार मुन्ना हैं। नवनिर्माण मंच के संस्थापक किशोर कुमार मुन्ना पूर्व निर्दलीय विधायक हैं। 2005 के विधान सभा चुनाव में सोनवर्षा विधानसभा में राजद के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के तत्‍कालीन पर्यटन मंत्री अशोक कुमार को किशोर कुमार मुन्‍ना, निर्दलीय कैंडिडेट ने हरा दिया था। इस चुनाव में किशोर कुमार मुन्‍ना 20000 मतों से विजयी हुए थे। अशोक सिंह तीन बार से इस क्षेत्र के विधायक रह चुके थे। इतना ही नहीं सरकार अल्‍पमत की रही, छ: महीने में ही गिर गई, लेकिन जनता ने दुबारा से अपने चहेते उम्‍मीदवार को ही चुना और किशोर कुमार मुन्ना दुबारा से विधायक बने। इसी समय नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने।

आपको बता दें कि 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में सुपौल से भाजपा प्रत्याशी रहे किशोर कुमार मुन्ना ने पार्टी से बगावत किया था और सहरसा से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन हार गए थे। मुन्ना 22 अक्टूबर 2014 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन के साथ पहले किशोर कुमार मुन्ना और नीरज कुमार सिंह बबलू (बीजेपी नेता और अभी बिहार के मंत्री) थे। बदलते हालात में नीरज भी विधायक से लेकर मंत्री बने हैं। सभी की पृष्ठभूमि बाहुबल से होकर गुजरती है। हालाँकि नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद बाहुबलियों का लगभग खात्मा हो गया। फिर भी अनंत सिंह सरीखे नेता अभी भी रसूख का इस्तेमाल करते हैं। सहरसा कोशी का इलाका है जो गरीबी, बेरोजगारी, पलायन, कोशी की विभीषिका, इंफ्रास्टक्चर से जूझ रहा है। मधेपुरा लोकसभा में तीन विधानसभा, सहरसा, सोनवर्षा, महिषी क्षेत्र हैं। पहले सहरसा लोकसभा सीट था। लालू यादव के राज में परिसीमन में इस सीट को खत्म किया गया और मधेपुरा लोकसभा सीट बना दिया गया। यानि सहरसा जिला के वोटर मधेपुरा जिला लोकसभा क्षेत्र के लिए चुनाव में वोट करते हैं। यही नहीं सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर विधान सभा क्षेत्र के वोटर खगड़िया लोकसभा सीट के लिए वोट डालते हैं।

सहरसा जिला के पंचगछिया गांव के मूल निवासी आनंद मोहन बाहुबली से लेकर विधायक से सांसद भी रहे हैं, जो वर्तमान में आईएएस कृष्णैया हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। फिलहाल पेरौल पर जेल से बाहर हैं और उनके एक बेटे शिवहर से राजद विधायक थे, जो अब जदयू में हैं। लवली आनंद पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी हैं। इसके बावजूद वह 2020 का विधानसभा चुनाव सहरसा से हार गई थी, बीजेपी को यहाँ जीती मिली थी। एनडीए के प्रत्याशी आलोक रंजन झा ने 103538 वोट हासिल कर महागठबंधन की ओर से मैदान में उतरीं लवली आनंद को 19679 मतों के अंतर से हराया था। लवली आनंद को 83859 वोट मिले। 2010 के परिसीमन के बाद से यह सीट लगातार भाजपा और राजद के बीच झूलती रही है। 2010 में भाजपा के आलोक रंजन जीते, 2015 में राजद के अरुण कुमार, लेकिन 2020 में भाजपा ने दोबारा इसे कब्जे में लिया।

Jetline

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