राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष: 2 अक्टूबर विजयादशमी के दिन अयोध्या में हजारों स्वयंसेवक करेंगे मार्च

RSS 100 Years Celebration

अयोध्या / दिल्ली :

RSS 100 Years Celebration : इस साल विजयदशमी 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। 21 अक्टूबर 2026 यानी अगले साल दशहरा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे हो जाएंगे। इस उपलक्ष्य में संघ एक साल पहले यानी 2 अक्टूबर 2025 से ही अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है जो पूरे एक साल चलेगा। देशी कलेंडर (विक्रम संवत) के लिए लिहाज से संघ विजयादशमी (दो अक्टूबर) से शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की शुरुआत करेगा।

डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित यह संगठन अब एक लाख शाखाओं का लक्ष्य रख रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर अयोध्या में पहली बार पथ संचलन होगा और सरसंघचालक का उद्बोधन भविष्य की दिशा तय करेगा। यह संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। विजयदशमी 2025 संघ के लिए नया अध्याय खोलेगा। सरसंघचालक का उद्बोधन स्वयंसेवकों को नई दिशा देगा, जो राष्ट्र को मजबूत बनाने का संकल्प लेगा।

अयोध्या में पहली बार विजयदशमी का कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां राम पथ पर हजारों स्वयंसेवक मार्च करेंगे। संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले मुख्य उद्बोधन देंगे। यह स्थानांतरण प्रतीकात्मक है। अयोध्या, राम जन्मभूमि का प्रतीक, संघ की हिंदू एकता की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
आपको बता दें कि शताब्दी वर्ष में पथ संचलन का विशेष महत्व है। यह संघ की शारीरिक और वैचारिक शक्ति का प्रदर्शन है। नागपुर का पथ संचलन 5,000 से बढ़कर 10,000 स्वयंसेवकों का होगा, जो अनुशासन और एकता का संदेश देगा। अयोध्या में राम पथ पर मार्च राम जन्मभूमि के प्रति संघ की निष्ठा को साकार करेगा।

संस्थापक आरएसएस की स्थापना 1925 में ब्रिटिश भारत के नागपुर शहर में एक डॉक्टर केबी हेडगेवार ने की थी। हेडगेवार, तिलकवादी कांग्रेसी , हिंदू महासभा के राजनीतिज्ञ और नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता बीएस मुंजे के राजनीतिक शिष्य थे। संघ की स्थापना के समय डॉ. हेडगेवार का उद्देश्य स्पष्ट था कि हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्र को मजबूत बनाना। उन्होंने कहा था- हिंदू राष्ट्र की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों का निर्माण आवश्यक है। शताब्दी वर्ष का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह संघ की यात्रा का आकलन करने का अवसर प्रदान करता है। 1925 से 2025 तक, संघ ने असंख्य चुनौतियों का सामना किया-विभाजन की विभीषिका, आपातकाल का अंधेरा, प्राकृतिक आपदाओं का संकट। फिर भी, यह संगठन बढ़ता गया।
आज संघ की शाखाएं 68,000 से अधिक हैं, और शताब्दी वर्ष में लक्ष्य है एक लाख शाखाओं तक पहुंचना। देश भर में पथ संचलन की तैयारियां जोरों पर हैं। नागपुर में पारंपरिक पथ संचलन 27 सितंबर को होगा, जिसमें 10,000 स्वयंसेवक भाग लेंगे—जो शताब्दी की भव्यता दर्शाएगी।

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का क्या है विचार

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ के पंच परिवर्तन अभियान पर जोर दिया और कहा कि व्यक्तिगत परिवर्तन, पारिवारिक परिवर्तन, सामाजिक परिवर्तन, पर्यावरणीय परिवर्तन और राष्ट्रीय परिवर्तन। उन्होंने कहा- संघ का लक्ष्य केवल शाखाओं का विस्तार नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को जोड़ना है।

आरएसएस के देश में लग रहे 83,000 से ज्यादा शाखा

आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर के मुताबिक आज देश में शाखाओं की संख्या 83,000 से ज्यादा हो चुकी है। उनका कहना है,’जब नागपुर में आरएसएस ने शुरू किया था, शाखा में मात्र 17 स्वयंसेवक थे। आज हम देश भर में साप्ताहिक 32,000 बैठकों के अलावा प्रतिदिन 83,000 से अधिक शाखा लगा रहे हैं।

Jetline

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