पटना : बिहार विधान सभा चुनाव के पहले नेताओं का काला चिठ्ठा बाहर आ रहा है। ये काम प्रशांत किशोर कर रहे हैं। इनकी पार्टी जन सुराज पहली बार बिहार चुनाव में पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरने वाली है। इसके पहले प्रशांत किशोर राज्य भर में दौरा कर चुके हैं और अब चुनावी प्रचार में जुटे हैं। इसके बीच अब वे नेताओं का काला कारनामे की पोल भी खोल रहे हैं।
इसकी चपेट में एनडीए ने नेताजी आ गए हैं। नीतीश कुमार के करीबी मंत्री और बीजेपी के बड़े नेता सम्राट चौधरी जो मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं, घेरे में आ गये। नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री है। ज्यादातर वक्त एनडीए के साथ रहे हैं, बीच में कुछ समय के लिए लालू यादव के साथ हो चले थे। अभी एनडीए के साथ ही बिहार विधान सभा चुनाव 2025 लड़ रहे हैं। 2005 के मुकाबले वर्तमान में नीतीश कुमार बेहद ही कमजोर-लाचार-बेबस राजनीतिज्ञ लग रहे हैं। मुख्यमंत्री कुर्सी के लिए इस बार बीजेपी-जदयू में आर-पार का मामला है। सीटें कम आयी तो नीतीश आउट, अगर ज्यादा तो फिर से नीतिसे कुमार।
इन सबके बीच चुनावी मौसम में जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार के भ्रष्ट नेताओं के भ्रष्टाचार का पिटारा खोल दिया है। प्रशांत किशोर ने अशोक चौधरी, दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल, मंगल पांडेय, सम्राट चौधरी जैसे एनडीए नेताओं की पोल खोल दी है। प्रशांत किशोर ने पटना में एनडीए नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर नाम बदलने और फर्जी डिग्री लेने का आरोप लगाया। अशोक चौधरी पर बेनामी संपत्ति खरीदने, दिलीप जायसवाल पर हत्या के आरोप को रफा-दफा करने, मंगल पांडेय पर पत्नी के नाम पर गलत तरीके से दिल्ली में फ्लैट खरीदने और संजय जायसवाल पर पेट्रोल चोरी का आरोप लगाया।
प्रशांत किशोर ने एनडीए के पांच नेताओं को भ्रष्ट बताया है जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल और संजय जायसवाल का नाम है। जदयू नेता अशोक चौधरी को सर्वदलीय भ्रष्ट नेता बताया और उन पर फर्जी तरीके से प्रोफेसर बनने का आरोप लगाया। हाल में बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने अशोक चौधरी को सहायक प्रोफेसर का चयन बिहार यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर के लिए किया है। गंभीर बात ये है कि बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष गिरीश चौधरी जो नीतीश कुमार के बेहद करीबी हैं, ने भ्रष्टाचार का ऐसा खेल किया है कि फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र पर सैंकड़ों अभ्यर्थियों को प्रोफेसर बना दिया गया है। ये मामले अभी पटना हाई कोर्ट में चल रहा है।
भ्रष्ट नेताओं के बार में लगे आरोप के बारे में जानिए
अशोक चौधरी : प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि मंत्री अशोक चौधरी ने दो-तीन वर्ष में 200 करोड़ से अधिक के भूखंड खरीदे। बेनामी और मानव विकास न्यास के जरिए। न्यास पर कोई प्रश्न-चिह्न नहीं, लेकिन उसे इस पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। सभी भूखंड अशोक चौधरी की बेटी शमवावी चौधरी(वर्तमान में लोजपा सांसद ) की सगाई के बाद से लेकर विवाह होने तक खरीदे गए।
मंगल पांडेय के बारे में प्रशांत किशोर कहते हैं कि दिल्ली में पत्नी के नाम फ्लैट खरीदने के लिए दिलीप जायसवाल से 25 लाख कर्ज लिए, जबकि उस समय उनकी पत्नी के बैंक खाते में 2.13 करोड़ रुपये थे। राशि कहां से आई, इसका भी ब्योरा है। अधिक बोलेंगे तो पोल खुल जाएगा।
दिलीप जायसवाल का भ्रस्टाचार : राजेश साह की हत्या के आरोपित हैं। तत्कालीन एसपी और जांच प्रभारी से मिलीभगत कर केस को रफा-दफा कराया। मामले की सही जांच के लिए राजेश की मां और बहन की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर करा दी गई है।
सम्राट चौधरी : प्रशांत किशोर ने कहा कि नाम बदलने के मास्टर हैं उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी । राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी उर्फ सम्राट कुमार मौर्य। मैट्रिक में फेल हैं। सुप्रीम कोर्ट में बिहार बोर्ड का हलफनामा है। 2010 के हलफनामे में सम्राट स्वयं को सातवीं पास बता रहे । अब कामराज यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट बता रहे हैं, जो यूनिवर्सिटी है ही नहीं। मैट्रिक नहीं किया और यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया से डीलिट की उपाधि ले ली। ये कैसा मजाक है।
संजय जायसवाल : छोटका चोर है। पेट्रोल चुराता है, फर्जी बिल बनाकर। बेतिया की महापौर ने, सशक्त स्थायी समिति की पांच बैठकों में लिए गए निर्णय के बाद, नगर आयुक्त को पत्र लिख इनके पेट्रोल पंप से निगम की गाड़ियों के तेल नहीं लेने का निर्देश दिया। 5.87 करोड़ का घपला हुआ है। 15 अगस्त के बाद के पेट्रोल वाउचर के भुगतान पर नगर निगम ने रोक लगा दी है।
केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने आरोपी बीजेपी नेता से इस्तीफा देने को कहा
प्रशांत किशोर के आरोपों के बाद बीजेपी में घमासान मचा है। .पूर्व केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा-या तो PK के आरोपों पर सामने आकर जवाब दें , नहीं तो पद-पार्टी छोड़ कर चले जायें। जो जवाब नहीं दे सकते, उन्हें पद पर रहने का हक नहीं।

