कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सरकारी स्कूलों में पत्रकारों और यूट्यूबर्स की बिना अनुमति एंट्री और वीडियोग्राफी पर कोर्ट ने रोक वाले आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अब पत्रकारों या सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को सरकारी स्कूलों का रियलिटी चेक करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से आधिकारिक अनुमति लेनी होगी।
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के प्रवेश तथा वीडियोग्राफी पर राज्य सरकारों द्वारा लगाये गये रोक पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने प्रिया मिश्रा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है। इन सरकारी स्कूलों के सर्कुलरों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) और 21 का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी ने देश भर के सरकारी स्कूलों के बदहाल ढांचे, शौचालयों की जर्जर अवस्था, पेयजल संकट और मिड-डे मील की खामियों को उजागर करने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत पार्टी के कार्यकर्ता और सोशल मीडिया यूज़र्स एवं कंटेंट क्रिएटर्स स्कूलों में जाकर बिना पूर्व अनुमति के वीडियो बना रहे और शेयर कर रहे थे। इस स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों के शिक्षा विभागों ने कड़े निर्देश जारी किए थे। शिक्षा विभागों का कहना है कि इससे स्कूलों की सुरक्षा प्रभावित होती है और पठन-पाठन पर भी बुरा असर पड़ता है। इस तरह से अनधिकृत प्रवेश से शिक्षक, विद्यार्थी और स्कूल प्रशासन दवाब में रहते हैं और इसको रोकने के लिए कानून बनाया गया है।
जानें किस राज्य ने क्या नियम बनाये ?
राजस्थान सरकार : राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने किसी भी बाहरी व्यक्ति के स्कूल में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की पूर्व अनुमति और फोटो/वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए लिखित पूर्व अनुमति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार : यूपी के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने अयोध्या, आगरा, आजमगढ़ और बलिया सहित कई जिलों में यूट्यूबर्स और बाहरी लोगों के बिना अनुमति स्कूल में घुसने व रिकॉर्डिंग करने पर रोक लगा दी है।
इस फैसले का क्या होगा असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों के आदेश प्रभावी बने रहेंगे। यानी अब किसी भी सरकारी स्कूल में प्रवेश या वीडियोग्राफी के लिए संबंधित अधिकारियों या स्कूल प्रशासन से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सीजेपी और अन्य संगठनों द्वारा बिना अनुमति अचानक स्कूलों में जाकर लाइव स्ट्रीमिंग या वीडियो शूटिंग करने पर अब कानूनी पाबंदी रहेगी।
सरकारों का मानना है कि इस फैसले से स्कूलों में अनाधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक लगेगी, माहौल सुरक्षित रहेगा और अध्ययन का वातावरण बेहतर होगा।

