Nithari killings: Accused Surendra Koli found dead in Haridwar. Surendra Koli, whose name remained associated for nearly two decades with the Nithari killings that shocked the nation in 2006, was found dead inside a tea kiosk in Haridwar’s Bhupatwala area on Friday. Police said preliminary findings indicated suicide, though the circumstances surrounding his death are being investigated.
देश भर में बहुचर्चित हुए उत्तर प्रदेश के नॉएडा स्थित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। यह घटना उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में हुई है। कोली कुछ दिन से हरिद्वार में चाय बेचने का काम कर रहा था। उसका शव चाय की दुकान में रस्सी के सहारे फंसे पर लटका मिला है। पुलिस ने अल्मोड़ा निवासी परिजन को सूचना देकर हर एंगल से जांच शुरू कर दी है। चर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली नाम बदलकर हरिद्वार में रह रहा था। वहां उसने लोगों को अपना नाम सदा राम बताया था। उसकी लाश चाय की दुकान में पड़ी मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की सुरेंद्र कोली निवासी ग्राम मंगरुखाल, भिकियासेड़ अल्मोड़ा, उत्तरखंड के रूप में कराई। हरिद्वार पुलिस के मुताबिक़ 2006 के निठारी सिलसिलेवार हत्याकांड में 2025 में सुप्रीम कोर्ट से सभी आरोपों से बरी किए गए सुरिंदर कोली हरिद्वार के भूपतवाला इलाक़े में मृत पाए गए। शुरुआती जांच में पता चला है कि वह कुछ महीनो से अपना नाम बदलकर हरिद्वार में रह रहा था और चाय का दुकान चला रहा था। दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को बरी किया था

साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने पंढेर और कोली 20 साल की पिंकी सरकार की हत्या का दोषी पाया था। पंढेर और कोली पर लड़की को अगवा करने, उसका बलात्कार करने और फिर उसकी जान लेने का आरोप है। 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उम्रकैद सुनाई थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों (पुलिस और सीबीआई) की कमजोर और त्रुटिपूर्ण जांच व ठोस वैज्ञानिक व फॉरेंसिक सुबूतों के अभाव का हवाला देते हुए सुरेंद्र कोली को उसके आखिरी बचे मामलों में भी बरी कर दिया। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सबूतों की कमी के चलते कोहली और पंधेर को बरी कर दिया था। जिसके बाद कोली जेल से बाहर आ गया था।
सुरेंद्र कोली अल्मोड़ा के मंगरूखाल का रहने वाला था। परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने के लिए वहवर्ष 2004-05 में रोजगार के सिलसिले में दिल्ली गया था। दिल्ली में वह मनिंदर सिंह पंधेर के यहां नौकरी करने लगा। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। 2006 के निठारी कांड में नोएडा से लापता बच्चों के कंकाल मिले थे, जिसमें सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर आरोपी थे। ये आरोप था कि बिजनेसमैन मनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली ने अपहरण कर बच्चों की हत्या की है। इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और आरोपितों को फांसी की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतरे थे।
जानिए निठारी गांव में कब-कब क्या हुआ था ?

निठारी कांड 2005 और 2006 के बीच नोएडा (उत्तर प्रदेश) के सेक्टर-31 स्थित व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पास से बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिलने की एक अत्यंत सनसनीखेज घटना थी।
नॉएडा के निठारी गांव में 29 दिसंबर 2006 में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे एक नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। मामले में मालिक मनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था। देश भर में हंगामा होने के बाद 11 जनवरी 2007 में सीबीआई को जांच सौंपी गई। सीबीआई की टीम निठारी गांव पहुंची और कोठी के पास से 30 और हड्डियां बरामद कीं। सीबीआई ने 22 मई 2007 में गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में कोली पर दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए थे।
13 फरवरी 2009 में निठारी में हुए एक के बाद एक 19 हत्या में से एक रिम्पा हालदार के साथ रेप और हत्या के लिए स्पेशल कोर्ट ने पंधेर और कोली को मौत की सजा सुनाई। 11 सितंबर 2009 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को मौत की सजा से से बरी कर दिया। 20 जुलाई 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सुरेंद्र कोली की दया याचिका खारिज कर दी। 08 सितंबर 2014 में कोर्ट ने रात एक बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी, कोली की इसी दिन फांसी होनी थी। 24 जुलाई 2017 में कोली और पंधेर को पिंकी की हत्या और रेप के प्रयास में सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराया। दोनों के खिलाफ हत्या के 16 मामलों में से यह 8वां मामला था, जिसमें फैसला सुनाया गया।
निठारी कांड के दूसरे आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर अभी जेल से है बाहर

सुरेंद्र कोली के साथ दूसरे आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी होने के बाद जेल से रिहा हो चुका है। करीब 17 साल जेल में बिताने के बाद, वह नोएडा जेल से बाहर आ गया था। अदालत ने उसे मामलों में राहत दे दी थी, और वर्तमान में वह जेल से बाहर है। मोनिंदर सिंह पंढेर निठारी के उस मकान का मालिक था, जहां सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। दिसंबर 2006 में मकान के पीछे नाले के पास बच्चों के अवशेष मिलने के बाद इस मामले ने पूरे देश को हिला दिया था। जांच के दौरान पंढेर और कोली दोनों को गिरफ्तार किया गया।
हरिद्वार /नॉएडा : सी एन मिश्रा

