BRICS Summit 2026: भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में 18वां शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। आज शिखर सम्मेलन का पहला दिन है।

DAY-1: प्रधानमंत्री मोदी बोले : संगठन सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करता है

PM Modi says The current structure of global governance looks like a pyramid. At the top, power and decision-making are concentrated, while at the bottom are countries that are affected by these decisions but are unable to shape them. The Global South is in the front row of global crises, but in the back row of decision-making. We need to change this privilege and pyramid into a platform and partnership, where every country has a voice, every member has a stake, and humanity’s development remains at the centre of every effort
आज पहले दिन के कार्यक्रम में ब्रिक्स समिट 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि ये संगठन सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। इस दौरान पीएम ने कहा कि दुनिया में सबकी आवाज सुनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा ग्लोबल गवर्नेंस का स्ट्रक्चर एक एक पिरामिड जैसा दिखाई देता है. इसके ऊपरी हिस्से में ताकत और फैसले लेने की शक्ति केंद्रित है, जबकि निचले हिस्से में वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं।
सुरक्षा परिषद में सुधारों को अब टाला नहीं जा सकता
उन्होंने कहा, ‘हमें ग्लोबल साउथ को नियम मानने वाले से नियम बनाने वाले में बदलने की दिशा में प्रयास करने होंगे. BRICS के जरिए, हम ग्लोबल साउथ के देशों के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत का कम्युनिकेशन स्किल, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने आगामी 20 सालों के रोडमैप की बात करते हुए कहा कि अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें। अगले 20 सालों के लिए हमें एक नए और एम्बिशियस एजेंडा पर काम करना होगा।

जिनपिंग दोपहर करीब भारत मंडपम पहुंचें। शी जिनपिंग का यह भारत दौरा करीब 7 साल बाद हो रहा है। BRICS बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच भी अलग से द्विपक्षीय बातचीत आज शाम में होगी। दोनों देशों के बीच व्यापार और सीमा से जुड़े मुद्दे इस बातचीत में अहम हो सकते हैं। BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को प्रगति मैदान के भारत मण्डपम में आयोजित हो रहा है। इस महाशिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और यूएई के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि दिल्ली आ चुके हैं। भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। ब्रिक्स 20 साल पुराना संगठन हो गया है। भारत चौथी बार इस ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार ब्रिक्स की थीम ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पहला दिन का कार्यक्रम
दिल्ली के भारत मंडपम में आज दोपहर 2 बजे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत आधिकारिक रूप में हो गयी। ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर बात होगी। शाम को सभी ग्लोबल लीडर्स ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का दौरा करेंगे। शाम 5 बजे सभी लीडर्स का एक फोटोशूट होगा। शाम को पौधारोपण कार्यक्रम के बाद 7 बजे पीएम मोदी की ओर से आयोजित डिनर में सब हिस्सा लेंगे।
ग्लोबल साउथ की समस्याएं का समाधान निकालने की कोशिश हो सकती है
#BRICS Summit 2026 in Delhi: ब्रिक्स का ये 18वां शिखर सम्मेलन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इसका आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया की पुरानी व्यवस्था रीसेट के दौर में हैं। संघर्षों की वजह से ऊर्जा से लेकर व्यापार तक प्रचलित व्यवस्थाएं बदल रही हैं और नए सिस्टम उनकी जगह ले रहे हैं। अमेरिका-ईरान के संघर्ष में आज होर्मुज बंद हुआ, लाल सागर के बाब अल मंदेब पर असर पड़ा, कल को मलक्का स्ट्रेट भी प्रभावित हो सकता है। ये दुनिया के प्रमुख ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर हैं। आगे कब कहां परिस्थितियां बिगड़ जाएं, ये कोई नहीं जानता। ऐसे में देश क्या करेंगे। इसी का समाधान निकालने की कोशिश हो सकती है, क्योंकि ये पूरे ग्लोबल साउथ की कहानी है।
पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के 11 सितम्बर को मिले
#BRICS Summit 2026: इधर BRICS दिल्ली पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के साथ होगी 11 सितम्बर को मीटिंग हुई। 2 हफ्ते में लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई । इससे पहले 1 सितंबर को दोनों नेता किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO समिट के दौरान मिले थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम द्विपक्षीय बैठक में भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर इस बातचीत में चर्चा हुई।

18वें ब्रिक्स सम्मेलन : 13 सितंबर को होगी ब्रिक्स बड़ी बैठक
13 सितंबर को बड़ी ब्रिक्स बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें ब्रिक्स देशों के अलावा भागीदार राष्ट्रों के डेलीगेशन चीफ, आमंत्रित देश और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख एक मंच पर होंगे। इस दौरान किए गए मुख्य समझौतों को शिखर सम्मेलन के अंतिम दस्तावेज़ में शामिल किए जाने की उम्मीद है। नई दिल्ली में कार्यक्रमों के दौरान पुतिन कई अन्य राष्ट्र प्रमुखों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
भारत का क्या है फोकस ?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता व्यापार, डिजिटल तकनीक, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन सुधारों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस शिखर सम्मेलन में ग्लोबल सप्लाई चेन, सीमा पार एकल भुगतान सिस्टम, राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक उपयोग, एमएसएमई (MSME) विकास, डिजिटल व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लचीलापन, विकास वित्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक का विस्तार और बहुपक्षीय वित्तीय व राजनीतिक संस्थानों के सुधार भी प्रमुखता से शामिल रहने की संभावना है।
पीएम मोदी सरकार ने ब्रिक्स के मूल विचार को चार बेहद ताकतवर शब्दों से जोड़ा
#BRICS Summit 2026 : पीएम मोदी सरकार ने ब्रिक्स के मूल विचार को चार बेहद ताकतवर शब्दों से जोड़ा है। यह थीम है बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’। इसमें ‘आर’ का अर्थ रेजिलिएंस यानी खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सप्लाई चेन की मजबूती से है। ‘आई’ का अर्थ इनोवेशन यानी एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्रांति है। ‘सी’ का अर्थ कोऑपरेशन यानी ग्लोबल साउथ के देशों का आपसी सहयोग है। ‘एस’ का अर्थ सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास से है। भारत का यह नया मंत्र मौजूदा वैश्विक संकटों के बीच पूरी दुनिया के विकास का एजेंडा तय करने जा रहा है।
आज का ब्रिक्स समूह पहले से कहीं अधिक विशाल और प्रभावशाली हो चुका है।
ब्रिक्स समूह में दुनिया की कुल आबादी का 49.5 प्रतिशत हिस्सा
ब्रिक्स (BRICS) समूह की औपचारिक शुरुआत साल 2006 में हुई थी। शुरुआत में इसमें केवल चार देश (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) शामिल थे और इसे ‘BRIC’ कहा जाता था। रूस के येकातेरिनबर्ग में 2009 में इसका पहला आधिकारिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। 2010–2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद यह समूह BRICS बन गया। वर्तमान में ब्रिक्स समूह में कुल 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये सभी देश मिलकर दुनिया की कुल आबादी का 49.5 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत उत्पादन इन्हीं देशों में होता है और दुनिया के कुल व्यापार में इनकी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है। एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक फैले इस संगठन के पास असीम प्राकृतिक संसाधन, विशाल उपभोक्ता बाजार, उन्नत तकनीकी क्षमताएं और विकास के अनूठे अनुभव मौजूद हैं।
ब्रिक्स समूह के सामने जी-7 कहीं नहीं टिकते : रूस के राष्ट्रपति पुतिन
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी 11 सितम्बर को जी-7 देशों पर हमला बोलते हुए कहा भी था कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन अकेले ब्रिक्स देशों ने किया है। इसके उलट तथाकथित जी-7 समूह का योगदान सिमटकर केवल 29 प्रतिशत रह गया है। पुतिन ने तंज कसते हुए कहा था कि वे समझ नहीं पाते कि उसे अमेरिका समर्थित जी-7 या ग्रेट-7 क्यों कहा जाता है, जबकि हकीकत इसके उलट है। उन्होंने विश्व अर्थव्यवस्था के विकास का आंकड़ा समझाते हुए कहा कि समान अवधि में वैश्विक आर्थिक विकास की आधी से अधिक यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि ब्रिक्स देशों की वजह से हुई है, जबकि जी-7 समूह का योगदान इसमें केवल 18 प्रतिशत रहा है। पुतिन ने इस भारी अंतर की सीधी वजह बताते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी बसती है, जिससे उनके पास बेहद गतिशील, विशाल और जीवंत घरेलू बाजार मौजूद हैं।
21 सितंबर से चीन के ग्वांगझू-नई दिल्ली रूट पर नियमित यात्री उड़ान सेवा फिर से शुरू होंगे
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चाइना सदर्न एयरलाइंस ने शनिवार को घोषणा की कि वह 21 सितंबर से ग्वांगझू-नई दिल्ली रूट पर नियमित यात्री उड़ान सेवा फिर से शुरू करेगी। करीब छह साल तक बंद रही यह सेवा दोबारा शुरू होने के साथ भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क को एक बार फिर मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। एयरलाइन के मुताबिक, सेवा बहाल होने के बाद वह दक्षिण एशिया में अपने आठ राउंड-ट्रिप रूट पर हर सप्ताह 100 से अधिक उड़ानों का संचालन करेगी। इससे दोनों देशों के बीच कारोबार, पर्यटन और आवाजाही को भी गति मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली : किशोर कुमार सिंह / डॉ निशा सिंह

