पटना :
बिहार में इस साल कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं. वोटर लिस्ट तैयार था लेकिन चुनाव के पहले इसमें गड़बड़ी की शिकायत मिली थी. इस मामले पर चुनाव आयोग ने फिर से मतदाता पुनरीक्षण करने का फैसला किया है. इसी क्रम में बिहार में एक जुलाई से मतदाता पुनरीक्षण का शुरू हुआ है. चुनाव आयोग के विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम बिहार के सभी जिलों में शुरु किया गया है. बूथ लेवल अफसर घर-घर जाकर लोगों से मतदाता सूची से जुड़े फार्म भरवा रहे हैं.
पिछले महीने 24 जून को निर्वाचन आयोग ने बिहार में विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का निर्देश दिया था. यह 25 जून से 26 जुलाई 2025 के बीच होना है. निर्वाचन आयोग ने पहले सभी मतदाताओं के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करना जरूरी किया था, लेकिन बाद में इसमें कुछ बदलाव भी किए गए.
सत्ता पक्ष और विपक्ष मे इस मुद्दे को लेकर तकरार के बीच बीएलओ (बूथ लेवल अफसर) घर-घर जाकर लोगों से मतदाता सूची से जुड़े फार्म भरवा रहे हैं, इस बीच सीमांचल के शहर कटिहार में अल्पसंख्यक बहुल मोहल्ले में इसको लेकर कई भ्रम की स्थिति भी है, कुछ लोग इसे एनआरसी से जोड़कर भी देख रहे हैं.
कैसे होगा मतदाता पुनरीक्षण का काम ?
एसआईआर दो तरीके से होगा. पहला बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर, एक प्री-फील्ड फॉर्म गणना प्रपत्र (मतदाता की जानकारी और दस्तावेज) लेकर जाएंगे. कोई भी व्यक्ति चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर यह फॉर्म डाउनलोड करके उसे भर सकता है. यहां प्री-फील्ड फ़ॉर्म का मतलब है कि वोटर के बारे में जानकारी पहले से ही फ़ॉर्म में भरी होगी. बीएलओ सिर्फ़ उनका वेरिफ़िकेशन करेगा. साथ ही अगर ज़रूरत होगी तो व्यक्ति को आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होंगे. प्री फील्ड फ़ॉर्म का आधार, इसी साल 7 जनवरी को चुनाव आयोग की ओर से घोषित मतदाताओं की प्रकाशित ‘अंतिम सूची’ है.
आपको बता दें कि 7 जनवरी को प्रकाशित हुई इस सूची के मुताबिक, बिहार में कुल 7 करोड़ 80 लाख 22 हजार 933 मतदाता हैं जिनमें 3 करोड़ 72 लाख 57 हजार 477 महिलाएं, 4 करोड़ 7 लाख 63 हजार 352 पुरुष और 2 हजार 104 थर्ड जेंडर हैं.

