लखनऊ :
बिहार में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) पूरा करने के बाद अब उत्तर प्रदेश में कल मंगलवार 4 नवंबर से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो रही है। पहले चरण में बीएलओ घर-घर जाकर लोगों को एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे। इसका उद्देश्य राज्य में मतदाता सूची का शुद्धिकरण करना है, जिसके तहत वोटर लिस्ट से फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना है। उत्तर प्रदेश में 22 साल पर फिर से ये प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
इस फॉर्म में सभी जानकारी भरकर इसकी दो प्रतियां वोटरों से ली जाएंगी। इनमें से एक प्रति बीएलओ के पास रहेगी जबकि दूसरी मतदाता को दी जाएगी। अगर किसी परिवार में मतदाता उपस्थिति नहीं हो तो ऐसे में परिवार का कोई अन्य सदस्य या वो रिश्ते की जानकारी देते हुए फॉर्म पर हस्ताक्षर कर सकता है। इस फॉर्म में मतदाताओं के माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर, आधार संख्या की जानकारी देनी होंगी।
पहले चरण में बीएलओ घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे, जिसे भरकर जमा करना होगा। इस दौरान किसी दस्तावेज की ज़रूरत नहीं होगी, बाद में जिनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट से लिंक नहीं होगा तो आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा और फिर घोषित दस्तावेज जमा कराने होंगे। जिन लोगों का जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है और उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में है तो उन्हें सिर्फ लिस्ट की कॉपी देनी होगी। लेकिन, अगर ऐसा नहीं है तो दिए गए 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है तो उन्हें अपना या माता-पिता का दस्तावेज जमा कराना होगा। चुनाव आयोग का कहना है कि साल 2003 की वोटर लिस्ट का वर्तमान लिस्ट से मिलान किया गया है, इनमें से 48 फ़ीसद वोटरों के नाम दोनों सूची में शामिल है।
जनवरी 2025 में चुनाव आयोग ने रिपोर्ट जारी किया था। इस समय यूपी में अब 15.35 करोड़ मतदाता हैं। चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण अभियान चलाने के बाद संशोधित मतदाता सूची जारी किया था। सूची में कुल 1885446 नाम जोड़े गए और 861147 नाम हटाए गए हैं। इस तरह से कुल 1024299 मतदाता बढ़े हैं। चुनाव आयोग ने 12 दिसंबर 2024 तक विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची के लिए आवेदन और आपत्तियां मांगी थीं। एक जनवरी 2025 के आधार पर विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था।

