शार्प वे न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली:
Screening of the film ‘Selfie Please’: दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से आईजीएनसीए के समवेत सभागार में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी फ्लीज’ का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया। यह फिल्म एक ऐसे परिवार की कहानी है, जिसमें बड़ी बहन डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है और छोटी बहन के अंदर ये भावना घर जाती है कि इस कारण मां बड़ी बहन पर ज़्यादा ध्यान देती है, उसको उपेक्षित करती है। फिल्म की लेखक और निर्देशक अनु सिंह चौधरी ने इस संवेदनशील विषय को बहुत मार्मिकता से पेश किया है।
इस अवसर पर उद्घाटन सत्र को रंगमंच विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद् मालविका जोशी और दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर ने संबोधित किया। मालविका जोशी ने कहा कि इस फिल्म का विषय बहुत संवेदनशील है और जिस तरह से पोस्टर पर ‘सेल्फी प्लीज’ लिखा गया है, वह अपने आप में बहुत कुछ कहता है। 15 मिनट की यह फिल्म किसी की ज़िंदगी का नजरिया बदल सकती है। प्रो. अनु सिंह लाठर ने कहा, “थियेटर के साथ, मीडिया के साथ हमारी उच्च शिक्षा का जो डिसकनेक्ट है, उसको ख़त्म करना हमारी बड़ी ज़िम्मेदारी है। मैं मंच से आपलोगों (थियेटर और मीडिया) से आग्रह करती हूं कि विश्वविद्यालयों के साथ आप जुड़ें। बच्चे बहुत उत्साही होते हैं, उनके साथ जुड़कर आपलोगों को बहुत अच्छा लगेगा।”
निर्देशक अनु सिंह चौधरी ने कहा कि इस फिल्म को बनाने में उन्हें काफ़ी लंबा समय लगा, क्योंकि एक डायरेक्टर के तौर पर आप चुनाव तभी कर सकते हैं, जब आपके पास दोनों चीजें हों- इनसान के तौर पर तजुर्बा और विषय को अपने तरीक़े से कहने की आज़ादी। कार्यक्रम के अंत में, आईजीएनसीए के मीडिया सेंटर के प्रमुख अनुराग पुनेठा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यह फिल्म हमें एक इनसान के तौर पर संवेदनशील बनाती है और शिक्षित भी करती है।
फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद ‘द मिथ ऑफ अ नॉर्मल फैमिली’ विषय पर एक विशेष संवाद आयोजित किया गया। इसमें फ़िल्म की लेखिका व निर्देशक अनु सिंह चौधरी, मालविका जोशी और iCANthink की संस्थापक दीपा गर्वा ने अपने विचार साझा किए। चर्चा का संचालन दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. संजीव राय ने किया, जबकि सहर बेग ने विषय की प्रस्तावना पेश की। इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें पैनलिस्टों ने दर्शकों के फिल्म से जुड़े सवालों का उत्तर दिया। उपस्थित दर्शकों ने फिल्म के संदेश और चर्चा को अत्यंत प्रासंगिक व प्रेरक बताया। यह आयोजन कला और शिक्षा जगत में एक सार्थक पहल है, जो परिवार, समाज और व्यक्तिगत पहचान के विमर्श को नई दृष्टि प्रदान करता है।

