नागपुर :
RSS chief Mohan Bhagwat’s ‘compulsion’ remark as he reacts to Trump tariffs, backs PM Modi. Mohan Bhagwat responded on Thursday to US tariffs on Indian goods, urging the country to focus on self-reliance while navigating global interdependence. This echoed Prime Minister Narendra Modi’s recent “swadeshi” call.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) गुरुवार को नागपुर में विजयादशमी उत्सव मना रहा है। इस अवसर पर संघ मुख्यालय, नागपुर में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अन्य लोग उपस्थित हैं। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर आरएसएस मुख्यालय के रेशमबाग मैदान में शस्त्र पूजा के दौरान पारंपरिक हथियारों के अलावा ‘पिनाक एमके-1’, ‘पिनाक एन्हांस’ और ‘पिनाक’ सहित आधुनिक हथियारों की प्रतिकृतियां तथा ड्रोन प्रदर्शित किए गए।
इस अवसर पर आरएसएस का शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ हो रहा है। यह 1925 में डॉ. केबी हेडगेवार की ओर से संगठन की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हो रहा है। विजयादशमी उत्सव संघ की देशभर की 83 हजार से अधिक आरएसएस के शाखाओं में भी मनाया जा रहा है। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने आरएसएस की शुरुआत की थी।
नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का सम्बोधन
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के 100 साल पूरा होने पर नागपुर में विजयदशमी उत्सव कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर मोहन भागवत ने देश के लोगों से स्वदेशी की अपील की और पड़ोसी देशों में जारी उथल-पुथल का भी जिक्र किया। इसके साथ ही संघ प्रमुख ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। मोहन भागवत ने कहा, सीमा पार से आए आतंकवादियों ने 26 भारतीयों का धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी। इस आतंकी हमले से देश शोक और आक्रोश में था। पूरी तैयारी के साथ हमारी सरकार और सशस्त्र बलों ने करारा जवाब दिया। सरकार का समर्पण, सशस्त्र बलों का पराक्रम और समाज में एकता ने देश में एक आदर्श वातावरण प्रस्तुत किया। संघ प्रमुख ने कहा कि प्रचलित अर्थ प्रणाली के अनुसार, देश आर्थिक विकास कर रहा है।
मोहन भागवत ने कहा कि अमेरिका ने जो टैरिफ नीति अपनाई, उसकी मार सभी पर पड़ रही है। ऐसे में हमें मौजूदा अर्थ प्रणाली पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होना चाहिए। संघ प्रमुख ने कहा कि सभी विविधताओं के साथ हमें एक सूत्र में पिरोने वाली भारतीय राष्ट्रीयता है, हिंदू राष्ट्रीयता है। जिसे हिंदू शब्द से आपत्ति है,वह हिंदवी कहे, आर्य कहे। हमारा राष्ट्र राज्य पर आधारित कल्पना नहीं है। हमारी संस्कृति राष्ट्र बनाती है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में पूरे भारत में श्रद्धा और एकाग्रता की लहर फैली, जबकि पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर निर्दोष नागरिकों की हत्या की।
उन्होंने कहा कि सेना का योगदान विश्व स्तर पर देखा गया है और देश के भीतर संवैधानिक उग्रवादी तत्वों का सामना करना भी आवश्यक है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा की ये वर्ष श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का सढ़े तीन सौ वर्ष है। जिन्होंने अत्याचार, अन्याय और सांप्रदायिक भेदभाव से समाज के मुक्ती के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और समाज की रक्षा की ऐसी एक विभूति उनका समरण इस वर्ष होगा। आज 2 अक्टूबर है तो स्वर्गीय महात्मा गांधी की जयंती नहीं है, जिनकी स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका योगदान अविस्मरणीय है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद भारत कैसा हो उसके बारे में विचार देने वाले हमारे उस समय के दार्शनिक नेता थे उनमें उनका स्थान अग्रणीय हैं। जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण दिए ऐसे स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री का आज जयंती है। भक्ति, देश सेवा के ये उत्तम उदाहरण हैं।
रामनाथ कोविंद ने कहा कि RSS एक पवित्र, विशाल वट वृक्ष की तरह है जो भारत के लोगों को एक साथ लाता हैं।
कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद ने भी नमन किया। इसके बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत कार्यक्रम से पहले शस्त्र पूजन किया, इसके बाद योग, प्रात्यक्षिक, नियुद्ध, घोष, प्रदक्षिणा का आयोजन किया जाएगा।
पीएम मोदी ने संघ के 100 साल होने पर दी बधाई
https://x.com/narendramodi/status/1973574362436374931
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ के 100 साल पूरे होने के अवसर पर बधाई दी। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि ‘आज से 100 साल पहले विजयादशमी के दिन ही समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। लंबे कालखंड के दौरान असंख्य स्वयंसेवकों ने इस संकल्प को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसे लेकर मैंने अपने विचारों को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।’
डॉ. निशा कुमारी

