बिहार विधानसभा चुनाव : मुकेश सहनी , पशुपति पारस और हेमंत सोरेन के लिए राजद और कांग्रेस कुछ कम सीटों पर लड़ेगी चुनाव

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पटना : शार्प वे न्यूज़ नेटवर्क

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। एनडीए में भी अभी सीट शेयरिंग फार्मूला फाइनल नहीं हुआ है। इधर विपक्ष महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अब बातचीत शुरू हुई है। सीटों का बंटवारा आरजेडी और कांग्रेस के बीच होना है.इसके अलावा लेफ्ट, मुकेश सहनी , पशुपति पारस और हेमंत सोरेन की पार्टी भी इस बार महागठबंधन का हिस्सा है। इस दफे महागठबंधन से जुड़े तीन नए सहयोगी जुड़ने से कांग्रेस और आरजेडी को अपनी कुछ सीटें इस बार इनको देनी पड़ेगी। यानि दोनों अपने हिस्से का कुछ सीटें इन दलों को देने जा रही है।

2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी 144 और कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। बाकी 29 सीटें वामपंथी दलों के खाते में गई थी। चुनाव नतीजे आए तो आरजेडी सबसे ज्यादा 75 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।कांग्रेस 27 फीसदी स्ट्राइक रेट से सिर्फ 19 सीटें ही जीत पाई ।तब महागठबंधन बेहद मामूली अंतर से बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था और तेजस्वी मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए थे। उसके बाद राजद ने इसका ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा था।इस बार कांग्रेस सीटों की संख्या के बजाय जिताऊ सीटों की मांग कर रही है। हालाँकि अभी सीट बंटवारे का फार्मूला फाइनल नहीं हुआ है।

पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता पार्टी (आरएलजेपी) इस बार महागठबंधन के साथ है और उसे पांच से सात सीटें मिलने की संभावना है। पारस का फोकस भी पासवान वोट बैंक पर ही है, क्योंकि यही उनका परंपरागत आधार है. आरएलजेपी जिन क्षेत्रों पर जोर दे रही है, उनमें खगड़िया, हाजीपुर और आसपास की कुछ आरक्षित सीटें शामिल हैं. इन क्षेत्रों में पारस की व्यक्तिगत पकड़ पहले से रही है.हाजीपुर क्षेत्र की विधानसभा सीटें – हाजीपुर लोकसभा से जुड़ी विधानसभा सीटें (जैसे महनार, रघोपुर, लालगंज) पर दोनों दल दावेदारी कर सकते हैं. चिराग का लोकसभा गढ़ यही है, जबकि पारस का भी यही आधार क्षेत्र रहा है.खगड़िया और आलौली – पारस का पुराना विधानसभा गढ़ आलौली रहा है. यदि एलजेपी-रामविलास यहां प्रत्याशी उतारती है तो यह मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा बिहार के सीमावर्ती और आदिवासी बहुल इलाकों में महत्त्वपूर्ण वोट बैंक रखती है, जिससे महागठबंधन को सामाजिक वोट बढ़ाने में मदद मिल सकती है. JMM ने महागठबंधन में 12 सीटों पर दावा किया है, जिसमें सीमावर्ती और आदिवासी बहुल क्षेत्र शामिल हैं. पूर्णिया, बांका, धमदाहा, चकाई, तारापुर, कटोरिया जैसी सीटें JMM अपने लिए मांग रही है. चर्चा यह भी है कि “ झारखंड मुक्ति मोर्चा को 7–8 सीट मिल सकती है. इसमें बांका, कटोरिया, चकाई, तारापुर बिहार-झारखंड की सीमा पर स्थित विधानसभा सीटें है. जहां जेएमएम का प्रभाव है. इसके अलावा पूर्णिया और धमदाहा की सीट पर भी जेएमएम दावा कर रही है. धमदाहा में आदिवासी वोटरों की संख्या प्रभावी है. बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पिछले प्रदर्शन की बात करें तो 2010 के चुनाव में जमुई के चकाई से सुमित सिंह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर जीत हासिल की थी. वहीं 2015 के चुनाव में JMM 32 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, और सभी सीटों पर जमानत जब्त हुई थी. आपको बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में जेएमएम ने राजद को 6 सीटें दी थी, जिसमें से 4 पर राजद उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी. ये चार सीटें है- गोड्डा, देवघर, विश्रामपुर, और हुसैनाबाद।

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