बिहार में राजीव प्रताप रूडी की सांगा यात्रा : राजपूत जाति से बीजेपी को चुनाव में कितना मिलेगा फ़ायदा ?

पटना : डॉ निशा सिंह

Bihar Election 2025: नीतीश कुमार, राहुल गाँधी, तेजस्वी यादव बिहार चुनाव को लेकर राजनीतिक यात्रा कर रहे हैं। बिहार विधान चुनाव 2025 में भी जाति के वोट बैंक निर्णायक होंगे। इसी को देखते हुए बीजेपी से राजपूत नेता और सांसद राजीव प्रताप रूडी बिहार में सांगा यात्रा राजपूत जाति के वोट बैंक की गोलबंदी करने में जुटे हैं। बिहार की राजनीति में जातियों का बोलबाला हमेशा से रहा है। ऐसे में बिहार में कौन सा वर्ग किसके साथ है, उसका असर चुनाव पर होगा।

लालू-तेजवसी यादव को यादव जाति, कांग्रेस को परंपरागत ब्राह्मण, नीतीश कुमार को कुर्मी, अति पिछड़ों, प्रशांत किशोर को पंडितों, बीजेपी को सवर्ण जातियों, पिछड़ों के वोट बैंक पर नज़र है। बिहार के राजपूत नेता, बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी बिहार के कई जिलों में अपनी सांगा यात्रा पर है। पूरे बिहार में लगातार सांगा यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा में राजपूत समाज के लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। राजीव प्रताप रूडी ने कहा है कि बिहार में राजपूत समाज को गारंटर की तलाश थी, जो सांगा यात्रा से मिल गया है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की 70 विधानसभा सीटों पर ठाकुर समाज भूमिका है। इसे कोई भी दल नजरअंदाज नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले राजपूतों का कोई गारंटर नहीं था, लेकिन अब हमारा समाज एक जुट हो रहा है। अब मुझे किसी के दबाब में नहीं रहना है। यही राजपूत का इतिहास है। लालू यादव परिवार को बार बार हराने वाले सारण से बीजेपी संसद राजीव प्रताप रूडी महागठबंधन के लिए 2025 विधान सभा चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती बने हैं।

2020 विधान सभा चुनाव बिहार में 28 राजपूत बने विधायक

बिहार में 28 राजपूत बने विधायक : अगर आंकड़ों की बात करें तो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 28 राजपूत विधायक जीतकर आए, जबकि 2015 में 20 राजपूत विधायक जीते थे। मतलब पिछली बार के मुकाबले 2020 में आठ अधिक राजपूत विधायक विधानसभा पहुंचे। 2020 में एनडीए ने 29 राजपूत को दिया टिकट था। बीजेपी ने 21 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से 15 जीते। जदयू के 7 राजूपत प्रत्याशियों में से 2 ही जीत सके। वहीं दो वीआईपी के टिकट पर जीते। इस तरह से एनडीए के 29 टिकट में से 19 राजपूत विधानसभा पहुंचे। 2020 चुनाव में महागठबंधन ने 18 राजपूतों को टिकट दिया था। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने 2020 में 18 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से महज 8 उम्मीदवार ही जीत सके। वहीं राजद ने 8 राजपूतों को टिकट दिया, जिनमें से सात उम्मीदवार जीते। कांग्रेस के 10 में से एक राजपूत को ही जीत मिली। इसके अलावा एक निर्दलीय राजपूत विधायक ने भी जीत दर्ज की।

बिहार में कितने हैं राजपूत नेता ?

राजपूत समुदाय के लोग एक दौर में बिहार की सियासत के सबसे ताकतवर कास्ट ब्लॉक माने जाते थे। सत्ता की चाभी उन्हीं के हाथों में हुआ करती थी, लेकिन आज की तस्वीर कुछ और है। आरजेडी के कार्यकाल के दौरान राजपूतों को पकड़ प्रदेश की राजनीति में काफी मजबूत थी। वर्तमान में राजपूतों की स्थिति पहले जैसी नहीं है। इसके बावजूद नीतीश सरकार में 4 राजपूत मंत्री हैं। बिहार चुनाव में राजपूत वोट, लालू के राज में राजपूत नेता रघुवंश सिंह, बशिष्ठ नारायण सिंह, जगदानन्द सिंह, नरेंद्र सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, अशोक सिंह, प्रभुनाथ सिंह, विजय कृष्ण, आनंद मोहन समेत नेता साथ थे। कई मंत्री भी थे, लेकिन अब धीरे -धीरे राजपूत का वोट बैंक लालू से दूर हो गया। पिछले कई चुनाव में राजपूतों का वोट अधिकांश बीजेपी में शिफ्ट हुआ है। इस बार के बिहार विधान सभा चुनाव में बीजेपी अब राजपूत वोट बैंक को पूरी तरह अपने पाले में लाना चाहती है। इस अभियान में बीजेपी संसद राजीव प्रताप रूडी और आनंद मोहन अभी बिहार में कई जिलों में यात्रा कर गोलबंदी में जुटे हैं। आनंद मोहन कि पत्नी लवली आनंद जदयू सांसद और बेटे राजद विधायक है, लेकिन अब जदयू के साथ है। बिहार में इस बार जदयू-बीजेपी एनडीए का हिस्सा है। प्रभुनाथ सिंह अभी जेल में हैं, जिन्हे निकालने के लिए प्रयास जारी है। वर्तमान में बिहार में बीजेपी से राजपूत जाति से तीन सांसद पूर्वी चंपारण से राधा मोहन सिंह, महाराजगंज से जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, सारण से राजीव प्रताप रूडी हैं। जबकि राजद से बक्सर से सुधाकर सिंह सांसद हैं।

जानिए राजनीति में कब रहा राजपूतों का दबदबा

साल 2014 से पहले तक राजपूत समुदाय आरजेडी के साथ रहा है। फिलहाल बिहार में राजपूत समुदाय बीजेपी के कोर वोटर बन गए हैं। आजादी के बाद से बिहार में कई बड़े राजपूत नेताओं का राजनीतिक दबदबा रहा है। 1969 में कांग्रेस के राजपूत नेता हरिहर सिंह चार महीने के लिए सीएम बने थे। 1983 से 1985 तक एक और राजपूत नेता चंद्रशेखर सिंह कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे। साल 2020 में 28 राजपूत विधायक बने। बिहार के 2020 के विधानसभा चुनाव में कुल 28 राजपूत विधायक जीते थे, जिनमें बीजेपी से 15, जेडीयू से 2, आरजेडी से 7, कांग्रेस से एक, वीआईपी से दो और एक निर्दलीय शामिल थे। वीआईपी से जीतने वाले दोनों विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। इस तरह बीजेपी के पास 17 राजपूत विधायक हो गए। साल 2015 चुनाव में 20 राजपूत विधायक जीते थे। मतलब पिछली बार के मुकाबले 2020 में 8 अधिक राजपूत विधायक विधानसभा पहुंचे थे। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में 4 राजपूत मंत्री हैं, जिसमें 2 बीजेपी कोटे से, एक जेडीयू से और एक निर्दलीय शामिल हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार से 6 राजपूत सांसद हैं, जिसमें 3 बीजेपी से और एक जेडीयू, एक एलजेपी (रामविलास) और एक आरजेडी से हैं।

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