नीतीश कुमार युग : चिराग पासवान को 29 सीट देकर बीजेपी ने नीतीश की घेरेबंदी कर दिया ?

nitish kumar ira

पटना :

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया है। सीट शेयरिंग फार्मूला फाइनल के अनुसार बीजेपी और जदयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें दी गई हैं। जीतन राम मांझी की पार्टी को 6 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 6 सीटें दी गई हैं। बिहार के पॉलिटकल एक्सपर्ट बताते हैं , कि 2020 चुनाव के बाद अब 2025 विधान सभा चुनाव बिहार की राजनीति कि दिशा और दशा दोनों बदल सकती है। इस दफे बिहार के 35 साल (लालू -नीतीश का कार्यकाल) का युग ख़त्म हो सकता है। पहले लालू -राबड़ी ने 1990 -2005 तक शासन किया जिसके बाद 2025 चुनाव तक नीतीश का शासन है। सूत्रों के अनुसार लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें देकर बीजेपी ने नीतीश कुमार के युग का अंत होने का संकेत दे दिया है। 2020 चुनाव में लोजपा (रामविलास) के कारण नीतीश कुमार को मात्र 43 सीटें मिली थी। तब कमजोर हो गए थे नीतीश कुमार। जद यू चाहती थी कि चिराग को कम सीटें दी जाय , लेकिन ऐसा हो नहीं सका। राजनीतक समझ रखने वाले बताते हैं कि अगर इस चुनाव में नीतीश कमजोर पड़े और बीजेपी का दबाब ज्यादा पड़ा तो , वे महागठबंधन के साथ जा सकते हैं ! वजह आज भी बिहार में लालू -नीतीश की जगह बीजेपी – और कांग्रेस अकेले सरकार बनाने में सक्षम नहीं हो पा रही है।

2020 चुनाव में चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को किया था नुकसान

2020 चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा रामविलास अकेले लड़ी थी , हालाँकि उनकी पार्टी बुरी तरह हार गयी थी. मात्र एक सीट मटिहानी पर जीत मिली। इस चुनाव में लोजपा रामविलास के टिकट पर बीजेपी के राजेंद्र सिंह , रामेश्वर चौरसिया जैसे कदावर नेता चुनाव लड़े थे , लेकिन हार गए थे। लोजपा रामविलास को मिली वोट शेयर के कारण जद यू मात्रा 43 सीटें जित सकीय थी। तब जद यू ने कहा था कि बीजेपी अन्दर – ही अंदर जद यू यानि नीतीश को ठिकाने लगाने का काम किया था। हालाँकि नीतीश कुमार के हाथ में फिर से सत्ता बरकरार रहा था। इस बार भी परिस्थिति कुछ अलग है। चिराग की पार्टी अबकी बार एन डी ए गढ़टबंधन का हिस्सा है। पीएम मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग इस बार सीट शेयरिंग फार्मूला में उपेंद्र कुशवाहा , जीतनराम मांझी से कहीं ज्यादा 29 सीट लेकर ये बता दिया है कि , इस बार उनकी भूमिका निर्णायक होने जा रही है।

उपेंद्र कुशवाहा , जीतन राम मांझी , चिराग तीनों पर बीजेपी का है कण्ट्रोल

अगर गठबंधन कि बात करें तो साफ है कि बीजेपी के कण्ट्रोल में उपेंद्र कुशवाहा , जीतन राम मांझी , चिराग तीनों हैं। चिराग और जीतनराम मांझी तो केंद्र में मंत्री हैं , जबकि उपेंद्र कुशवाहा अपने अस्तित्व बचने की कोशिश में जुटे हैं। सीट शेयरिंग फार्मूला का आंकलन करे तो साफ लगता है कि इस बार जद -यू , बीजेपी दोनों पार्टी 101 सीट पर लड़ रही है , लेकिन राजनितिक टीकाकार मानते हैं , बीजेपी इस दफे कुल – 142 सीटें (बीजेपी -101,रामविलाश-29 , हम – 6 ,आर एल एस पी-6 ) पर लड़ रही है। यानि इस बार जद यू की स्थिति बेहद ही कमजोर है। चिराग के मुकाबले इस बार पशुपति पारस की स्थिति बिलकुल ख़राब हो चुकी है। पार्टी अब कोमा में है। यानि पासवान के वोट पर अब चिराग की पकड़ मजबूत हो चुकी है।

लोजपा (रामविलास) के कई सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार खड़े होंगे!

सूत्रों के मुताबिक इस बार लोजपा (रामविलास) के कई सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार खड़े होंगे। यानि जो काम 2020 चुनाव बीजेपी ने किया था ,वही रणनीति इस बार भी है। बीजेपी CEC कि मीटिंग में बीजेपी के कैंडिडेट के नाम पर मुहर लग चुकी है। अभी लिस्ट जारी नहीं हुई है। दिल्ली , और बिहार के वरिष्ठ पत्रकरों का मानते हैं कि इस बार नितीश कुमार घिर चुके हैं। अगर जद यू को 50 सीटें से कम आयी तो फिर नीतीश कुमार इरा ख़तम हो जायेगा, यानि मुख्यमंत्री नहीं बन पायेंगे। लेकिन अगर ये संख्या पार कर गए तो फिर नहीं चाहते हुए भी बीजेपी को उनको फिर मुख्यमंत्री बनाना पर सकता है। हालाँकि बीजेपी कि रणनीति है कि किसी भी हालात में ज्यादा सीटें जीतकर इस बार बिहार में अपना बीजेपी का मुख्यमंत्री बनायें। आज़ादी के बाद अभी तक बीजेपी का बिहार में मुख्यमंत्री नहीं बन पाया है। हालाँकि 2005 से अभी तक 20 साल में बिहार में एनडीए की सरकार है (बीच में कुछ साल छोड़कर ), फिर भी मुख्यमंत्री बीजेपी का नहीं बन पाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे , चाहे परिस्थिति क्यों न बदलता रहे।

नीतीश कुमार कि पलटी राजनीति पर बीजेपी की है नजर

नीतीश कुमार इस दौरान लालू यादव के मिलकर चुनाव(2015) भी लड़ा और जीता भी , मगर बीच में पलटी मारकर फिर से बीजेपी के साथ होकर सरकार बना ली। 2020 चुनाव में बीजेपी के साथ चुनाव लड़ेऔर फिर से मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार बीच में अनबन के चलते फिर पलटी मारे और लालू के साथ मिलकर सरकार बना ली। लेकिन 2024 में हालत बदला तो नीतीश फिर से पलटी मारे और बीजेपी के साथ होकर सरकार बना ली , यानि मुख्यमंत्री का पड़ा इनके पास ही रहा। अबकी बार फिर से विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार कि अग्नि परीक्षा है। अगर जीते तो ठीक नहीं तो इनका राजनतिक अध्याय ख़तम हो जायेगा। उम्र हावी है , पार्टी पर पकड़ कमजोर पड़ रहा है। पार्टी के कई नेतों पर भ्रस्टाचार के आरोप से नीतीश कि छवि पर असर पड़ा है। फिर भी कई स्किम के माध्यम से वोटरों को चुनाव के ठीक पहले आर्थिक लाभ देकर और आगे एक करोड़ नौकरी देने का वादा करके वोटरों से उम्मीद पला हैं , कि इस बार , अंतिम बार मौका मिले।

बिहार में दो चरणों में चुनाव होंगे। 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी और 14 नवंबर को मतगणना होगी।

पहले फेज में 18 जिलों में इन 121 सीटों पर मतदान:

पहले चरण में गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, खगड़िया, बेगुसराय, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर यानी 18 जिलों में वोटिंग होगी।

दूसरे फेज में कुल 20 जिलों में इन 122 सीटों पर मतदान:
दूसरे फेज में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया,कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद,अरवल, रोहतास, कैमूर यानी कुल 20 जिलों में मतदान होगा।

Jetline

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