दिल्ली : डॉ. निशा सिंह
साल 2025 में गठित राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग पत्रकारों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। मीडिया और समाजसेवा में सक्रिय लोगों के अलावा प्रशासन और पुलिस के अनुभवी आला अधिकारियों ने इस संगठन को अपना सहयोग और संरक्षण देकर इसे नई मजबूती प्रदान कर दी है। अगर इस संगठन के विस्तार की बात की जाए तो कुछ ही महीनों में हिंदी राज्यों के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों और दक्षिण भारत में भी इसने अपनी पैठ बना ली है।
हमारा लोकतंत्र चार मजबूत स्तंभों पर टिका हुआ है। विधायिका कानून निर्माण का कार्य करती है, कार्यपालिका उन कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाती है और न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि कानून संविधान तथा जनता के हितों के अनुरूप हों। इन तीनों स्तंभों के साथ लोकतंत्र का चौथा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ पत्रकारिता है, जो निष्पक्ष भाव से सत्ता से प्रश्न पूछकर जनता की आवाज़ को मजबूती देती है। पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया है कि पत्रकारों की भूमिका जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही उनकी सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान को लेकर चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। यदि पत्रकारों को एक मजबूत, भरोसेमंद और संगठित समर्थन प्रणाली उपलब्ध हो, तो वे और अधिक निर्भीक, निडर और निष्पक्ष होकर लोकतंत्र की सेवा कर सकते हैं। इसी आवश्यकता ने एक संगठित पहल को जन्म दिया। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के गठन के पीछे वरिष्ठ पत्रकार निशिकांत राय का दूरदर्शी संकल्प और संवेदनशील नेतृत्व है।
कैसी है राष्ट्रीय कार्यकारिणी की संरचना ?
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग केवल पत्रकारों के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे में यह मंच पत्रकारों को एकजुट करने, उनकी आवाज़ को सशक्त बनाने और निडर पत्रकारिता को संरक्षित करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र के अनुभवी और सक्रिय लोगों का सहयोग ले रहा है। आयोग की रूपरेखा की बात की जाए तो इसके संरक्षक, सलाहकार, अध्यक्ष, उपाध्यक्षक, महासचिव, सचिव और सदस्य जैसे पदों को बनाया गया है। इसमें मीडिया और समाजसेवा अलावा प्रशासन और पुलिस के अनुभवी लोग शामिल हुए हैं। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल लोग इस तरह से हैं –
राष्ट्रीय संरक्षक –
सेवानिवृत आईपीएस प्रमोद कुमार ठाकुर- इन्हें पी के ठाकुर के नाम से जाना जाता है। बिहार के सफलतम डीजीपी में से एक पी के ठाकुर अपने प्रशासनिक कुशलता और निर्णय के लिए जाने जाते हैं। 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी पी के ठाकुर जून 2014 से फरवरी 2018 में अपनी सेवानिवृत्ति तक बिहार पुलिस के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्यरत रहे। पुलिस प्रशासन में विभिन्न पदों पर रहने के अलावा 2018 से 2023 तक इन्होंने बिहार राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दी है। इनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड डिस्क से सम्मानित भी किया जा चुका है।
सेवानिवृत आईपीएस अजय कुमार सिंह – सेवानिवृत आईपीएस और झारखंड के भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक अजय कुमार सिंह जी आयोग में संरक्षक के रूप में शामिल हुए हैं। 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार सिंह अपने 36 वर्षों के कार्यकाल में पुलिस प्रशासन में विभिन्न पदों रहने के साथ ही दो बार झारखंड के डीजीपी के रूप में अपने प्रभावी रणनीति और सशक्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं।
राष्ट्रीय सलाहकार –
सेवानिवृत आईएएस बिपिन कुमार सिंह – बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक रह चुके बिपिन कुमार सिंह बी के सिंह के नाम से जाने जाते हैं और पत्रकारों के हितों के लिए शुरूआत से ही कार्य करते रहे हैं।
सेवानिवृत आईपीएस डॉ. चौरसिया चंद्रशेखर आजाद बिहार सरकार के अपराध शाखा में डीआईजी रह चुके हैं।
सेवानिवृत आईएएस सतीश कुमार शर्मा बिहार सरकार के योजना विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सेवानिवृत आईपीएस विनोद कुमार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में डीआईजी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सेवानिवृत आईएएस डॉ. रणबीर कुमार लोकसभा सचिवालय में निदेशक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सेवानिवृत आईपीएस जितेन्द्र मिश्रा आईजी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सेवानिवृत आईएएस अविनाश कुमार सिंह झारखंड में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
डॉ. प्रो. अमरेंद्र प्रसाद सिंह टीएनबीयू यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग में विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
मुकेश कौशिक दैनिक भास्कर में कार्यरत हैं।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
निशिकांत राय,अध्यक्ष एवं संस्थापक
सत्य नारायण भट्ट, कार्यकारी अध्यक्ष
डॉ. प्रो. निशा कुमारी, महासचिव
सुरेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष
संदीप चौधरी, उपाध्यक्ष
सुदर्शन कुमार, संयुक्त सचिव
रजनीश पुष्कर, संयुक्त सचिव
लव व्यास, संगठन सचिव
थोकचोम रणजीत सिंह, सदस्य
डॉ. वारिस अहमद खान, सदस्य
निभा शर्मा, सदस्य
अमिया मल्लिक, सचिव
संघमिता सिंह, सचिव
एस. के. चंदेल, सदस्य
विनय कुमार तिवारी, सदस्य
मनोज कुमार शर्मा, सदस्य
निशांत भारती, सदस्य
संजय कुमार मिश्र, कार्यकारी सदस्य
इंजीनियर लक्ष्मीकांत पटेल, सदस्य
संदीप कुमार, कार्यकारी सदस्य,
अमित कुमार, ईलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रभारी
किन राज्यों में आयोग का हुआ विस्तार ?
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग अपने व्यापक सोच और उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से होते हुए बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, ओडिसा, हरियाणा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, जैसे राज्यों तक फैल चुका है और पत्रकारों के हितों के लिए एक आगे आया है। बता दें कि इस आयोग का लक्ष्य केवल विचार प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रभावी संस्थागत ढांचा विकसित करना है, जो पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकारों और स्वतंत्रता को व्यवहारिक स्तर पर सुनिश्चित कर सके।

