जयपुर : आलोक शर्मा
देश में सबसे अधिक बाल विवाह राजस्थान में होते हैं और अब राज्य में बाल विवाह का भी रजिस्ट्रेशन होगा. राजस्थान विधानसभा में आज विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कानून विपक्ष के भारी हंगामे के बीच पारित हो गया. इस कानून के मुताबिक अब किसी भी तरह के विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है, जिसमें बाल विवाह भी शामिल है. विपक्ष ने सदन में इस बिल पर हंगामा किया और आरोप लगाया कि यह बाल विवाह को मान्यता देना है. इस बिल के पास होने से बाल विवाह की संख्या बढ़ेगी, जबकि पहले से ही राज्य बाल विवाह के लिए बदनाम है.
विपक्ष ने बिल का जमकर विरोध किया
बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह बाल विवाह के खिलाफ बने शारदा एक्ट का भी उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि बाल विवाह को किसी तरह की मान्यता नहीं दी जा सकती है. हालांकि राजस्थान सरकार ने सफाई दी है कि बाल विवाह के पंजीकरण का मतलब उसे मान्यता देना नहीं है. बालिग होने पर ऐसे बाल विवाह को रद्द करवाया जा सकता है. विपक्ष ने सदन में इस बिल पर मत विभाजन की मांग को लेकर हंगामा किया और सदन का बहिष्कार भी कर दिया. हालांकि इस कानून को स्पीकर ने ध्वनी मत से पारित कर दिया.
विवाह रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऐसे होगी ?
राजस्थान में विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए ब्लॉक स्तर पर विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी के यहां रजिस्ठ्रेशन कराना होगा. बाल विवाह होने पर भी अभिभावकों को इसकी सूचना रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देकर विवाह का पंजीकरण कराना होगा.
राजस्थान के इन 16 जिलों में होते हैं सबसे ज्यादा बाल विवाह
यूनीसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में दुनिया के 40 प्रतिशत बाल विवाह होते है. राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सबसे खऱाब स्थिति है. इसमें सबसे अधिक बल विवाह राजस्थान में होते हैं. राजस्थान के 16 जिले ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा बाल विवाह होते हैं. ये जिले हैं- दौसा, जोधपुर, भीलवाड़ा, चुरू, झालावाड़, टोंक, उदयपुर, करौली, अजमेर, बूंदी, चितौडगढ़, नागौर, पाली, सवाईमाधोपुर, अलवर और बारां. राजस्थान में हर साल आखातीज के दिन खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक बाल विवाह होते हैं.
बाल विवाह को रोकने के लिए क्या है कानून ?
वर्ष 1978 में संसद द्बारा बाल विवाह निवारण कानून पारित किया गया, जिसमें विवाह की आयु लड़कियों के लिए कम से कम 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल निर्धारित की गई थी और इसके उल्लंघन कर बाल विवाह कराने पर सजा का प्रावधान है, जो दो साल तक का कारावास और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है और इसमें हिस्सा लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति भी दोषी माना जाता है. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार भी बाल विवाह अपराध है. राजस्थान में बाल विवाह की सूचना देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी, ग्राम सेवकों व शिक्षकों की लम्बी चौड़ी फौज है, फिर भी अनेक जगह बाल विवाह होते है और इसका सबसे बड़ा कारण लिंगभेद और अशिक्षा है.


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