High turnout of women in Nitish’s rallies, will it be Decisive Factor
दिल्ली : निशा सिंह
बिहार विधान सभा चुनाव प्रचार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव दोनों की सभाओं में कुछ खास दिख रहा है। नीतीश कुमार की सभा में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज़्यादा देखी जा रही है, जबकि तेजस्वी की सभा में ठीक उलटा है। तेजस्वी यादव की सभा में आई महिलाओं की राय भी साफ़ है कि उनका वोट नीतीश कुमार को जाएगा। तो क्या इस बार बिहार के महिला वोटर्स का वोट सौ फीसदी नीतीश कुमार के पक्ष में जा रहा है ! अगर ऐसा हुआ तो नीतीश कुमार की पार्टी जद यू को पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें मिलेंगी। चुनाव आयोग के मुताबिक बिहार में कुल 7 करोड़ 43 लाख मतदाता हैं। इनमें पुरुष- 3.92 करोड़ और महिला- 3.50 करोड़ वोटर्स हैं।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21 लाख महिलाओं को 10-10 हज़ार रुपये उनके बैंक अकाउंट में सीधे भेजा। यह राशि विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले भेजी गई है। मुख्यमंत्री ने महिला लाभार्थियों के खातों में कुल दो हजार एक सौ करोड़ रुपये अंतरित किए। इस योजना के अंतर्गत तीसरी बार यह राशि लाभार्थियों के खाते में भेजी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर को नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस योजना का शुभारंभ किया था। बिहार में इस योजना के लिए एक करोड़ दस लाख से अधिक महिला लाभार्थियों का चयन किया गया है। ग्रामीण विकास विभाग की इस योजना का उद्देश्य महिलाओं में उद्यमिता और स्वरोजगार को प्रोत्साहन देना है। यह योजना स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से चलाई जा रही है।
इस बार नीतीश के साइलेंट वोटर्स बोल रहे है !
बिहार विधान सभा चुनाव में इस बार एनडीए और महागठबंधन में सीधा मुकाबला हो रहा है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए और तेजस्वी यादव के सीएम फेस पर महागठबंधन चुनाव लड़ रही है। 2020 विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार के खिलाफ माहौल बना था। परिणाम 243 विधान सीटों में जदयू को मात्र 43 सीटें मिल सकी थी। फिर भी बीजेपी के सहयोग से वे मुख्यमंत्री बने रहे। राजद 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बानी थी। बीजेपी को 74 सीटें मिली थी।
तब चिराग पासवान फैक्टर को हार का कारण माना गया। इस बार चिराग पासवान एनडीए के साथ है। नीतीश कुमार का अपना टारगेट फिक्स है, उनके वोटर्स साइलेंट मोड में हुआ करते थे, अबकी बार बोल रहे हैं। नीतीश को फिर से जीताने के लिए इस बार उनके समर्थक मीडिया में खुलकर बोल रहे हैं। जाति के वोट बैंक खुलकर किसी को एकतरफा वोट करने पर अपनी राय नहीं दे रहे हैं। मुस्लिम वोट बैंक इस बार नाराज जरूर हैं, लेकिन नीतीश को हराने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। मुस्लिम वोट बैंक सौ फीसदी महागठबंधन के पक्ष में जायेगा, इसकी गारंटी भी नहीं है। फिर निर्णायक वोट महिलाओं की होने वाली है। महिलाओं के मन में नीतीश कुमार ही हैं। वजह उनके कई योजना से बिहार की महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं। महिलाओं में जंगलराज का डर नहीं है। इस बार बीजेपी और जेडीयू ने 13-13 महिलाओं को टिकट दिया है। सीट बंटवारे में दोनों ही पार्टियों के हिस्से 101 सीटें आई हैं। यानी दोनों ही पार्टियों ने महिलाओं को 13 प्रतिशत से भी कम की भागीदारी दी है। राजद ने 24 महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया है। आरजेडी सबसे अधिक 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, कांग्रेस ने 61 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, वीआईपी ने 14, सीपीआई (एमएल) ने 20, सीपीआई 9, सीपीएम ने 4 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। आईपी गुप्ता की आईआईपी को 3 सीटें मिली हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रथम चरण के लिए कुल 1,690 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें से 1,375 नामांकन वैध पाए गए। 61 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस लिए, जिसके बाद कुल उम्मीदवारों की संख्या 1,314 रह गई है।
इस बार बीजेपी और जेडीयू ने 13-13 महिलाओं को टिकट दिया
इस बार बीजेपी और जेडीयू ने 13-13 महिलाओं को टिकट दिया है। साल 2020 चुनाव में कुल 370 महिलाएं चुनाव में बतौर उम्मीदवार भाग लेने उतरीं थीं। इनमें 26 विधानसभा पहुंचने में सफल रहीं। जेडीयू से 26 महिलाओं को, बीजेपी से 13 महिलाओं को और आरजेडी से 16 महिलाओं को टिकट दिए गए थे। साल 2015 में कुल 272 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थीं। इनमें सबसे अधिक बीजेपी ने (14), आरजेडी (10), जेडीयू (10), कांग्रेस ने 5, हम (एस) ने 4, एलजेपी ने 4, सीपीआई ने 2, सीपीआईएम ने 3 और सीपीआई (एमएल) ने 7 महिलाओं को टिकट दिया था। इनमें से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाली 28 महिला विधायकों में जेडीयू से 9, आरजेडी से 10, बीजेपी से 4, कांग्रेस से 4 और एक निर्दलीय थीं।
जानिए 2025 में बिहार विधान सभा की स्थिति
बिहार के स्थानीय निकायों में 1.4 लाख महिला-जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 3 महिलाएं लोकसभा में और 26 विधानसभा में हैं। बिहार विधानसभा में अभी बीजेपी के 80 विधायक हैं, आरजेडी के 77, जेडीयू के 45 और कांग्रेस के 19 विधायक हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) के 11, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 4, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) के 2, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के 2, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 1 और 2 निर्दलीय विधायक हैं।
बिहार में दो चरणों में चुनाव होंगे। 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी और 14 नवंबर को मतगणना होगी।
पहले फेज में 6 नवम्बर को 18 जिलों में इन 121 सीटों पर मतदान:
पहले चरण में गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, खगड़िया, बेगुसराय, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर यानी 18 जिलों में वोटिंग होगी।
दूसरे फेज में 11 नवंबर को कुल 20 जिलों में इन 122 सीटों पर मतदान:
दूसरे फेज में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया,कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद,अरवल, रोहतास, कैमूर यानी कुल 20 जिलों में मतदान होगा।

