दिल्ली : डॉ. निशा सिंह
भारतीय संविधान की 75 वीं वर्षगांठ तथा भारत के गणतंत्र के रूप में स्थापित होने के उपलक्ष्य में ‘हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान’ अभियान चलाया जा रहा है। प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था “द मिशन” ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से भारतीय संविधान के 75वें स्वर्णिम गौरव पर्व पर “हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान” नामक भव्य राष्ट्रीय उत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर 29 सितम्बर को दिल्ली के डॉ अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एक कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम एक साल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत आयोजित क्षेत्रीय कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था। सांस्कृतिक मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से यह कार्यक्रम दी मिशन संस्था द्वारा आयोजित गया गया था। इस मौके वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि भारत के संविधान को देश का मौलिक कानून बताया और कहा कि “जहाँ सब समान, सबका सम्मान, यहीं है भारत का संविधान।” भारत के हर नागरिक को भारत के संविधान का सम्मान करना चाहिए। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि हरिवंश चावला, डॉ. शशिबाला, नीरज पाठक, पंकज साहाय और आचार्य वेणुमोहन थे।

प्रतिष्ठित वरिष्ठ वकील और अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ और BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BRICS CCI) के अध्यक्ष हरवंश चावला ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारत के संविधान से प्रेरणा लेकर कतर देश में संविधान बनाया गया है। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के प्रावधानों को कई अन्य देश भी आगे अपनायेंगे। प्रो. डॉ. शशिबाला ने कहा कि भारत के संविधान के हरेक शब्द के अलग-अलग मायने है, जिसे सटीक रूप से समझने की जरुरत है। प्रो. डॉ. शशिबाला ने कहा जैसे विज्ञान के क्षेत्र में ओलंपियाड होते हैं, ठीक उसी प्रकार के संविधान का ओलंपियाड होनी चाहिए। इस समारोह का संचालन सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अतुल जैन ने किया। इस कार्यक्रम के आयोजक दी मिशन संस्था के प्रेसिडेंट संजीव शेखर झा ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों के साथ-साथ बच्चों को भारतीय संविधान के बारे में जागरूक करना है।
अभियान का क्या है मुख्य उद्देश्य
संवैधानिक मूल्यों को बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है। नागरिकों के बीच भारतीय संविधान के मूल मूल्यों को दोहराना और संविधान के निर्माताओं के योगदान का सम्मान करना हैं। इसके अलावा कानूनी सशक्तिकरण का भी उद्देश्य है, जिस दिशा में काम हो रहा है। नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और कर्त्तव्यों के बारे में शिक्षित करके कानूनी सशक्तिकरण को बढ़ावा देना उद्देश्य प्रमुख है। जागरूकता के लिए पूरे देश में नागरिकों के बीच संविधान की समझ को गहरा करना और कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। बता दें कि यह अभियान 24 जनवरी, 2024 को उपराष्ट्रपति द्वारा नई दिल्ली के डॉ. बी. आर. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में शुरू किया गया था।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण
इस राष्ट्रीय उत्सव में भव्य फिल्म शो, संगोष्ठी, सांस्कृतिक पोस्टर-पेंटिंग प्रदर्शनी, संगीत, नृत्य एवं नाटिका प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही, संविधान रत्न सम्मान समारोह का भी आयोजन हुआ। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, विधिवेत्ताओं, साहित्यकारों और समाजसेवियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें विशेष रूप से अतुल जैन, अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, को न्याय एवं विधि के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘न्याय रत्न विभूषण’ से अलंकृत किया गया। भारतीय संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा ने लोकतंत्र, समानता और मानवाधिकारों की सुदृढ़ नींव स्थापित की है। इस आयोजन के माध्यम से संविधान के आदर्शों और मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा व्यक्त की गई और समाज को दिशा देने वाली विभूतियों को “संविधान रत्न सम्मान” प्रदान किया गया।
हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए इसे लोकतंत्र और जनकल्याण का स्तंभ कहा है। यह राष्ट्रीय समारोह उन्हीं मूल्यों को पुनः स्मरण कराने और समाज में प्रसारित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बना। यह उत्सव भारतीय संस्कृति की “ज्ञान-आधारित परंपरा” और समावेशी दृष्टि को पुनर्जीवित करते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बना — यह संदेश देते हुए कि भारत केवल संवैधानिक व्यवस्था का राष्ट्र नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान और मूल्यनिष्ठ आचरण का वैश्विक पथप्रदर्शक है।

