दिल्ली।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गहमागहमी अब अपने अंतिम चरण पर हैं और पूरे देश की निगाहें इस बार बिहार की सियासत पर टिकी हुई हैं. बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए सहित महगठबंधन के तमाम बड़े चेहरे लगातार बिहार के दौरे पर जा रहे हैं. बिहार चुनाव को लेकर एनडीए के सभी बड़े नेता 3 सितंबर को दिल्ली में बैठक भी कर चुके हैं. इसी संदर्भ में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बिहार के वरिष्ठ पत्रकार निशिकांत राय ने कहा कि इस बार मुकाबला कांटे का होगा.
निशिकांत राय ने कहा कि इस बार का चुनाव बेहद पेचीदा और दिलचस्प होने वाला है. एक ओर एनडीए गठबंधन में बीजेपी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास) और जीतन राम मांझी जैसे पुराने सहयोगी दल हैं, तो दूसरी ओर महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, पप्पू यादव, मुकेश सहनी जैसे दल मौजूद हैं. इसके अलावा तीसरी ताकत के रूप में जनसुराज मैदान में है, जो जमीनी स्तर पर गंभीरता से मेहनत कर रहा है.
बिहार चुनाव में ये मुद्दे प्रमुख रहेंगे
निशिकांत राय ने कहा कि इस बार के चुनाव में जातीय समीकरण, विकास बनाम जंगलराज, भ्रष्टाचार और नए राजनीतिक प्रयोग, आदि बिंदुओं पर चुनाव केंद्रित रहेगा. बिहार में शुरू से ही जातीय आधार पर वोटिंग होता रहा है, इस बार भी होगा. इसके अलावा नीतीश कुमार के विकास कार्यों और पिछली सरकार के जंगलराज को भी जनता ध्यान में रखेगी.
वोटर अधिकार यात्रा चुनाव असर डालेगा
राय ने कहा कि वोटर अधिकार यात्रा को बिहार में बहुत सफलता और समर्थन मिला है. राहुल गांधी, तेजस्वी यादव सहित महगठबंधन के तमाम बड़े नेताओं ने इस यात्रा में जमकर हिस्सा लिया, इसका असर चुनाव पर भी होगा, लेकिन ये समर्थन वोट में तब्दील होगा या नहीं, कहना अभी जल्दीबाजी होगी.
मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार की छवि
मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार पर “दलबदलू” का आरोप भी लगा है, लेकिन यह एक राजनीतिक आरोप हो सकता है. नीतीश कुमार ने बीते 20 वर्षों में बिहार के विकास में जो योगदान दिया है, वह निर्विवाद है. उन्होंने सड़कों का जाल बिछाया, बिजली गांव-गांव तक पहुंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किए. आधी आबादी यानी महिलाओं को नौकरी और रोजगार में आगे लाने का श्रेय नीतीश कुमार को जाता है. बिहार, जिसे पिछड़ा कहा जाता था, नीतीश कुमार ने महिलाओं को आगे करने राज्य ही नहीं, बल्कि देश में मिसाल पेश किया है.
बिहार में सरकार किसकी बनेगी?
निशिकांत राय ने कहा कि इस बार स्पष्ट तौर पर किस पार्टी की सरकार होगी, बताना मुश्किल है. सभी पार्टियां अपनी ही परेशानी से जुझ रही हैं. अगर कहा जाय कि दोनों ही गठबंधन की पार्टियों का राज्य में अब कोई बड़ा चेहरा नहीं है, तो गलत नहीं होगा. नीतीश कुमार खराब स्वास्थ्य से जुझ रहे हैं तो पार्टी में उनके बराबर कोई और चेहरा भी नहीं है. राजद के भ्रष्टाचार और परिवारवाद की कहानियां अभी भी लोगों के जेहन में है. कांग्रेस अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रही है, तो बीजेपी अपने जनाधार को बढ़ाने की जुगाड में है. इस तरह से सभी बड़ी पार्टियों की अपनी समस्याएं हैं. किसकी सरकार बनेगी, इसका जवाब शायद अंतिम चरण की मतगणना ही दे पाए.
चुनाव में प्रशान्त किशोर के जनसुराज पार्टी की भूमिका
जनसुराज पार्टी दोनों प्रमुख गठबंधनों के वोट में सेंध लगा सकती है. हालांकि इसे ‘वोटकटवा’ कहना जल्दबाज़ी होगी. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर की अगुवाई में यह संगठन पूरी आक्रामकता से आगे बढ़ रहा है और जनता के सामने पुराने शासन की खामियों को उजागर कर रहा है. किशोर के पास सभी प्रमुख दलों की कार्यशैली की गहरी समझ है, जो उन्हें एक मजबूत रणनीतिकार बनाती है.
त्रिशंकु विधानसभा संभव
दोनों प्रमुख गठबंधनों की स्थिति और जनसुराज के उभार और तीन ध्रुवीय मुकाबले को देखते हुए इस बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति भी बन सकती है. इस बार परिणाम बेहद रोचक हो सकते हैं और कोई भी गठबंधन स्पष्ट बहुमत पाने से चूक भी सकता है.

