बिहार चुनाव में बाहुबलियों की इंट्री : अनंत सिंह, सूरजभान, आनंद मोहन, नीरज सिंह बबलू, धूमल सिंह के आने से क्या बदलेगा समीकरण !

entry of bahubali in the Bihar Assembly Election 2025

डॉ. निशा सिंह :
Bihar Assembly Election 2025:

पटना : बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में बाहुबलियों की इंट्री हो चुकी है। अनत सिंह, सूरजभान, आनंद मोहन, नीरज सिंह बबलू, धूमल सिंह के आने से क्या एक बार सरकार बनाने में इन लोगों भूमिका होने वाली है ? इन बहबलियों में कई खुद चुनाव लड़ रहे हैं, तो कई अपने परिवार को लड़ा रहे हैं।

1990-2005 (लालू-राबड़ी का कार्यकाल) में बाहुबलियों का बोलबाला रहा था। 1990 के दशक में बिहार में लालू यादव का राज था। इस दौरान अपराध चरम पर था, अपहरण उद्योग से लोग हलकान थे, लोगों का पलायन बिहार से अधिक होने लगा। इसी बीच अपराध की दुनिया से आने वाले अपराधी “बाहुबली ” का इस्तेमाल लालू प्रसाद ने किया। नतीजा रहा है कि कई बहबली विधायक, सांसद बन गए। इनलोगों की छवि के चलते आम लोग दहशत में रहा करते थे। इस दौर को बिहार में जंगलराज से नवाजा गया। लालू-राबड़ी जब सत्ता से हटे तो नीतीश कुमार 2005 में सत्ता में आये। इसके बाद लॉ एंड आर्डर पर नियंत्रण करने में सफल हुए। इस दौरान बाहुबलियों का आतंक कम हुआ। कई को जेल में डाला गया, तो कई गुमनाम हो गए। हालाँकि ये बात भी याद रखना जरूरी है, जब नीतीश कुमार पहली दफा मात्र सात दिन मुख्यमंत्री रहे थे, तब सूरजभान सहित कई बाहुबलियों ने नीतीश सरकार को बचाने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण नीतीश कुमार को इस्तीफा करना पड़ा था, तब राबड़ी देवी सरकार वापस सत्ता में आयी थी।

नीतीश कुमार 2005 से अब 2025 तक लगातार सत्ता में हैं और मुख्यमंत्री हैं। इस दौर में बाहुबलियों की कोई नहीं चली। लेकिन इस बार 2025 में फिर से बाहुबलियों की एंट्री हो गयी है। सरकार बनाने के लिए बीजेपी, राजद, जदयू, जनसुराज पार्टी में अबकी बार बाहुबलियों को टिकट दिया गया है। जदयू ने मोकामा से अनत सिंह, एकमा से धूमल सिंह, कुचाएकोट से अमरेंद्र पांडे, नबीनगर से चेतन आनंद (आनंद मोहन के बेटे), बीजेपी के छातापुर से नीरज सिंह बबलू, लोजपा रामविलास ने ब्रह्मपुर सीट से हुलास पांडेय, राजद से जहानाबाद से सुरेंद्र यादव, रघुनाथपुर सीट शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब, जनसुराज के सहरसा से किशोर कुमार मुन्ना को टिकट दिया है। राजद से अब बाहुबली नेता सूरजभान की पत्नी मोकामा से चुनाव लड़ेंगी। इस सीट पर अब उनका मुकाबला अनंत सिंह से होगा। इस हॉट सीट पर अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह (राजद) को हराकर सूरजभान पहली बार विधायक बने थे, तब मोकामा में अपराध चरम सीमा पर हुआ करता है। सूरजभान ने 15 अक्टूवर को पशुपति पारस की लोजपा पार्टी से इस्तीफा किया और अब राजद में शामिल हो गए हैं। पूर्व बाहुबली विधायक मुन्ना शुक्ला की पत्नी अन्नू शुक्ला ने वैशाली की लालगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान किया है।

बिहार के 49 फीसदी जनप्रतिनिधि के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित – एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर)की एक रिपोर्ट के मुताबिक महागठबंधन के 79% विधायकों पर आपराधिक मामले हैं, जबकि एनडीए के 70% विधायकों पर ऐसे मामले हैं। पाला बदल के बाद एनडीए गठबंधन के 134 में से 55 तथा महागठबंधन के 102 में 61 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। भाजपा के 83 में 41 (49 प्रतिशत), राजद के 72 में से 43 (60 प्रतिशत), जदयू के 47 में से 13 (28 प्रतिशत), कांग्रेस के 17 में से नौ (53 प्रतिशत), सीपीआइएमएल (एल) के 11 में से सात (64 प्रतिशत), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेकूलर) के चार में से एक (25 प्रतिशत), सीपीआइ (एम) के दो में दो (100 प्रतिशत), एआइएमआइएम के एक में से एक (100 प्रतिशत) तथा दो निर्दलीय में से दो (100 प्रतिशत) विधायकों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा किए हैं।

बिहार की सियासत में बाहुबली नेताओं की है एक लंबी लिस्ट

बिहार की सियासत में बाहुबल के तड़के का रिश्ता पुराना है।आनद मोहन, अनंत सिंह से लेकर सूरजभान, रामा सिंह, शहाबुद्दीन, मुन्ना शुक्ल, पप्पू यादव, सुरेंद्र यादव, राजू तिवारी से लेकर सुनील पाण्डेय तक, बाहुबली नेताओं की एक लंबी लिस्ट है। इनमें कई निर्दलीय चुनाव लड़कर पहली बार सदन पहुंचे थे। 1970 के दशक से शुरू हुए इस सिलसिले में वीर महोबिया, वीर बहादुर सिंह, प्रभुनाथ सिंह, सूरजभान सिंह, पप्पू यादव, राजन तिवारी और मुन्ना शुक्ला जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर ने पहली जीत निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हासिल की। लोकसभा में काली पांडेय और विधान परिषद में रीतलाल यादव ने भी निर्दलीय जीत के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। 1990 के दशक में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का नाम भी बिहार के बाहुबलियों में तेजी से उभरा। कम उम्र में ही उन्होंने कोसी और सीमांचल में समानांतर सत्ता स्थापित कर ली थी। 1990 में महज 23 साल की उम्र में उन्होंने मधेपुरा की सिंहेश्वर सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री ली। 1991 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव ने पूर्णिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। इससे कोसी क्षेत्र में उनका प्रभाव और मजबूत हुआ। वर्तमान में भी पप्पू यादव निर्दलीय सांसद हैं। आंनद मोहन पहली बार सहरसा के महिषी से विधयक बने थे, बाद में सांसद बने। वर्तमान में गोपालगंज के डी एम जी कृष्णैय्या हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। अभी पैरोल पर जेल से बाहर हैं। नीतीश कुमार की सरकार में अभी हाल में जेल से बाहर निकले हैं। उनके पुत्र चेतन आनंद जदयू से नबीनगर से प्रत्याशी हैं। 2020 चुनाव में राजद से शिवहर से विधायक थे। आंनद मोहन की पत्नी लवली आनंद जदयू सांसद हैं।

वर्ष 2000 में कई बाहुबलियों ने निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा तक का सफर तय किया। इसमें सबसे चर्चित नाम सूरजभान सिंह का रहा। उन्होंने मोकामा सीट से राबड़ी सरकार के मंत्री और बाहुबली अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हराकर सुर्खियां बटोरी थीं। वैशाली-मुजफ्फरपुर के बाहुबली विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला ने अपने राजनीति करियर की शुरुआत निर्दलीय चुनाव से की थी। मुन्ना शुक्ला ने अपने भाई छोटन शुक्ला की हत्या के बाद उनकी विरासत संभाली। वर्ष 2000 में मुन्ना शुक्ला ने लालगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे। अभी मुन्ना शुक्ला इस समय आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसी दौर में राजन तिवारी गोविंदगंज से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और वहां के मौजूदा विधायक भूपेन्द्र नाथ दूबे को पराजित किया।

Jetline

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