दिल्ली : डॉ. निशा सिंह
एम्स–आईसीएमआर की स्टडी में सामने आया है कि आपका एक बेतुका कमेंट किसी की जान भी ले सकता है। किसी को रंग, किसी के शरीर की बनावट तो किसी को खानपान, रहन-सहन, बोलने -चलने की शैली को लेकर ट्रोल होना पड़ता है। स्टडी में सामने आया है कि शरीर के वजन के दोनों छोरों पर मौजूद करीब हर दूसरा युवा बॉडी इमेज से जुड़ी मीडियम से गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है। स्टडी में सामने आया है कि शरीर के वजन के दोनों छोरों पर मौजूद करीब हर दूसरा युवा बॉडी इमेज से जुड़ी मीडियम से गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है। स्टडी में सामने आया है कि करीब हर दूसरा युवा बॉडी इमेज से जुड़ी मीडियम से गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
Effects Of Body Shaming On Mental Health: हालांकि बॉडी शेमिंग की दिक्कत सालों से चली आ रही है, लेकिन इसको लेकर आई स्टडी में बताया गया है कि युवाओं में बॉडी इमेज को लेकर बढ़ती चिंता मेंटल हेल्थ समस्या बनती जा रही है। Journal of Education and Health Promotion में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार एम्स–आईसीएमआर के युवा एडल्ट में वजन कंट्रोल पर चल रहे रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा है। इसमें 18 से 30 साल के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया है, जो एम्स की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे थे। स्टडी के मुताबिक, मोटे युवाओं ने 49 प्रतिशत और कम वजन वाले युवाओं ने 47 प्रतिशत गंभीर बॉडी इमेज चिंता की शिकायत की, जबकि सामान्य या थोड़ा ज्यादा वजन वाले युवाओं करीब 36 प्रतिशत इसकी शिकायत की।
बता दें कि इस स्टडी में शामिल ज्यादातर युवा छात्र थे और मध्यम इनकम फैमिली से आते थे। इन युवाओं में करीब 25 प्रतिशत मोटापे से पीड़ित थे, जबकि 11 प्रतिशत कम वजन वाले थे। अध्ययन से पता चला कि कम वजन वाले युवा सामान्य वजन वालों की तुलना में करीब दोगुना, जबकि मोटापे से जूझ रहे युवा लगभग तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज तनाव झेल रहे थे।
युवा वजन कम करने से पीछे क्यों हट जाते हैं ?
रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि वजन से जुड़ी समस्याओं का इलाज मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करके नहीं किया जा सकता है। कई युवा वजन घटाने की शुरुआत पूरे जोश के साथ करते हैं, लेकिन समय के साथ मानसिक थकान, चिंता, पढ़ाई का दबाव और जीवन में बदलाव उन्हें पीछे कर देता है। एक्सपर्ट का मानना है कि वजन कंट्रोल सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं है। अगर इमोशनल समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो युवा प्रोग्राम बीच में ही छोड़ देते हैं, इसलिए इसमें मानसिक जांच को जोड़ना बेहद जरूरी है।
बॉडी शेमिंग से होनेवाली परेशानियां
बॉडी शेमिंग आप खुद के लिए भी कर सकते हैं और दूसरों के लिए भी, जिसमें किसी के वजन, बाल, उम्र, कपड़े, खाने की पसंद आदि का मजाक उड़ाना शामिल है। एक्सपर्ट का मानना है कि चाहे कोई हमें सीधे बोले या किसी और को, यह हमारे मेंटल हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदायक है। इससे हमारे मन में हीन भावना आती है और हमें लगता है कि हमारी मूल्य सिर्फ हमारे बाहरी लुक से है। इस बॉडी शेमिंग से कई तरह की परेशानियां देखी जा सकती है, जैसे- अपनी बॉडी में कमियां ही ढूंढते रहना, खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आना, हर वक्त घबराहट और बेचैनी रहना, हर समय टेंशन में रहना, आदि।

