बफ्फ कानून के बाद बिहार एस आई आर से मुस्लिम वोटर सत्तारूढ़ एनडीए से नाराज हैं। मुस्लिम मतदाताओं को महागठबंधन और जन सुराज पार्टी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
पटना : इस बार बिहार फतह के लिए बीजेपी ने 40 फीसदी हिंदू वोटर्स पर फोकस किया है। बफ्फ कानून के बाद बिहार एस आई आर से मुस्लिम वोटर नाराज हैं। मुस्लिम मतदाताओं को महागठबंधन और जन सुराज पार्टी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 17 फीसदी से अधिक है, जोकि 243 में से 87 विधानसभा सीटों पर खासा असर रखते हैं। अगर ग्राफ की बात कि जाये तो राज्य में मुसलमानों की आबादी के हिसाब से इस समुदाय के 40 विधायक बिहार विधानसभा में होने चाहिए, लेकिन विधानसभा में केवल 19 मुस्लिम विधायक ही हैं।
जानिए बिहार में मुस्लिम समुदाय का क्या है असर !
2023 की जाति-जनगणना के मुताबिक बिहार की कुल आबादी लगभग 13 करोड़ है। इसमें मुस्लिमों की संख्या करीब 2 करोड़ 30 लाख (17.7 फीसदी) है। ये 87 सीटों पर जीत-हार तय करते हैं, जबकि सूबे के 4 जिले ऐसे हैं, जहां इनकी आबादी सबसे ज्यादा है। इन्हीं में से एक किशनगंज में मुसलमानों से प्रशांत किशोर ने बात की है, इस जिले में सबसे ज्यादा 68 फीसदी मुस्लिम हैं। इसके बाद कटिहार में 44 फीसदी, अररिया में 43 फीसदी और पूर्णिया में 38 फीसदी है। इन चारों जिले में 24 विधानसभा सीटें आती हैं।
बिहार में मुसलमानों के वोटों का बड़ा हिस्सा आरजेडी के खाते में अब तक जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में राजद के 18 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और उसे 8 सीटें जीतने में कामयाबी मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 12 मुस्लिमों को टिकट दिया था, जिसमें 4 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। इसके अलावा जेडीयू ने 10 उम्मीदवारों पर भाग्य आजमाया, लेकिन खाता नहीं खुला. हालांकि बीएसपी और सीपीआईमाले एक-एक सीट जीतने में कामयाब हो गई थी। वहीं, ओवैसी ने भी 15 मुस्लिमों पर दांव खेला था और उन्हें एक 5 सीटें जीतने में कामयाबी मिली, लेकिन ये सभी पांचों विधायक बाद में राजद में शामिल हो गए।
जानिए बिहार में किस धर्म की कितनी आबादी
2023 की जाति-जनगणना के मुताबिक, बिहार में सबसे ज्यादा हिंदुओं की संख्या है. वे10 करोड़ 71 लाख 92 हजार 958 ( 81.99) हैं। इसके बाद मुस्लिम 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार 925 (17.70%), ईसाई 75238 (0.05%), सिख 14753 (0.011%), बौद्ध 111201 (0.0851%), जैन 12523 (0.0096%) हैं। अगर जातियों की बात की जाए तो यादव 14 फीसदी, ब्राह्मणों 3.66 फीसदी, राजपूत 3.45 फीसदी, मुसहर 3 फीसदी, कुर्मी 2.87 फीसदी और भूमिहार 2.86 फीसदी हैं।

