पटना / दिल्ली : डॉ निशा सिंह
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए खेमे में कई उम्रदराज़ विधायकों की टिकट कटने की आशंका बढ़ गई है। इसी आशंका को देखकर बीजेपी के कई नेताजी अब अपने बेटों को टिकट दिलाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। ये बुजुर्ग नेताजी पटना से लेकर दिल्ली तक दौर लगा रहे हैं। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक इस दफे कई पुराने नेता जी का टिकट कटना तय है।
बिहार विधानसभा के 243 विधायकों में से 68 की उम्र 65 साल से अधिक है, जिनमें 31 की आयु 70 से 80 वर्ष के बीच है। सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक हैं। बिहार में बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता 70 की उम्र पार कर चुके हैं। इनमें आठ बार के विधायक और मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, सात बार के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, तथा पांच बार जीत चुके पूर्व मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
बुजुर्ग नेता जी बेटे को टिकट दिलाने के लिए पटना से दिल्ली तक कर रहे हैं लॉबिंग
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बजने के बाद बीजेपी के भीतर एक नई सियासी हलचल है। किसे टिकट मिलेगा , इसको लेकर बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान , विनोद तावरे ने पटना में 2 दिनों तक बैठक की। अब टिकट का फाइनल लिस्ट बीजेपी केन्द्रीय चुनाव समिति के पास भेजा जायेगें। इसके बाद केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में फाइनल लिस्ट पर मुहर लगेगी। इसके बाद लिस्ट जारी कर दी जाएगी।
इस बार बिहार में बीजेपी पार्टी के कई बड़े नेताजी वंशवाद की राजनीति करने में जुटे हैं। कई कद्दावर नेता ‘पुत्र मोह’ में घिरे नजर आ रहे हैं. 70 साल की उम्र पार कर चुके ये दिग्गज नेता, जिनके अपने टिकट कटने की प्रबल संभावना है, अब दिल्ली से पटना तक अपने बेटों के लिए विधानसभा टिकट सुनिश्चित करने की जोर-आजमाइश में जुट गए हैं। यह स्थिति भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, जहां उन्हें वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी के युवा चेहरे पेश करने के संतुलन के बीच पुत्र मोह की इस नई लहर से निपटना होगा।
जानिए कौन है बीजेपी के कदावर नेताजी , जो अपने परिवार के लिए टिकट चाहते हैं?
नंदकिशोर यादव – बिहार विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष और पटना साहिब से नौ बार विधायक रहे नंदकिशोर यादव (70+ वर्ष) का नाम भी टिकट कटने वालों की सूची में है. वे अपने बेटे नितिन कुमार ‘रिंकू’ को पटना साहिब से टिकट दिलाने को प्रयासरत हैं।
अवधेश नारायण सिंह – पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह भी अपने बेटे सुशांत रंजन और प्रशांत रंजन को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं. उनका पसंदीदा विधानसभा क्षेत्र आरा है।
रामकृपाल यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के बेटे अभिमन्यु यादव अपने संगठन ‘टीम अभिमन्यु’ के नाम से फतुहा क्षेत्र में सक्रिय हैं. रामकृपाल यादव अपने बेटे के लिए फतुहा से टिकट चाहते हैं, जहां पिछली बार भाजपा के सत्येन्द्र सिंह चुनाव लड़कर हार गए थे.
अश्विनी चौबे – केंद्रीय मंत्री रह चुके अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत भी भागलपुर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं. एक बार भागलपुर से चुनाव लड़कर हार चुके हैं. अर्जित 2018 की भागलपुर सांप्रदायिक घटना में भी चर्चा में रहे थे और हाल ही में सनातन महाकुंभ में काफी सक्रिय थे.
आरके सिन्हा – भाजपा के सीनियर लीडर और सांसद रहे आरके सिन्हा के बेटे ऋतुराज सिन्हा पहले पटना साहिब से लोकसभा का टिकट चाहते थे. अब चर्चा है कि वे पटना की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. वे अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं और संगठन में अभी राष्ट्रीय सचिव की भूमिका निभा रहे हैं.
अमरेंद्र प्रताप सिंह – आरा विधानसभा से लगातार जीतते रहे कद्दावर नेता अमरेंद्र प्रताप सिंह (70+ वर्ष) भी अपनी विरासत अपने बेटे को सौंपने की तैयारी में हैं और आरा विधानसभा से अपने बेटे को टिकट दिलाना चाहते हैं.
विनोद नारायण झा – मधुबनी से विधायक रहे विनोद नारायण झा, जो पूर्व में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री भी रहे, अब अपने बेटे डॉ. विभय झा को राजनीति में उतारना चाहते हैं. हालांकि, डॉ. विभय झा वर्तमान में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) में सक्रिय हैं.
अरुण कुमार सिन्हा – कुम्हरार विधान सभा क्षेत्र से लगातार (2005-2020) जीतते रहे विधायक अरुण कुमार सिन्हा (70+ वर्ष) भी अपने बेटे अशीष सिन्हा के लिए कुम्हरार विधानसभा से टिकट चाह रहे हैं। अशीष सिन्हा पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा युवा मोर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इसी सीट से भाजपा नेता और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार बैठे हैं. इसी सीट पर पहले सम्राट चौधरी चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन अब मन डोल रहा है।
रामप्रीत पासवान – बिहार सरकार में पूर्व पीएचईडी मंत्री और मधुबनी के राजनगर से विधायक रामप्रीत पासवान भी अपने बेटे दीपक कल्याण को टिकट दिलाने के लिए पैरवी कर रहे हैं. दीपक कल्याण क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं और अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।
प्रेम कुमार – गया शहर से 8 बार लगातार विधायक रहे और वर्तमान में सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार (70 वर्ष) भी अपने बेटे के लिए गया शहर से टिकट चाह रहे हैं. उनकी लोकप्रियता के बावजूद, उम्र का फैक्टर उनके लिए चुनौती बन सकता है।
बिहार में दो चरणों में चुनाव होंगे। 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी और 14 नवंबर को मतगणना होगी।
पहले फेज में इन 121 सीटों पर मतदान:
पहले चरण में गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, खगड़िया, बेगुसराय, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर यानी 18 जिलों में वोटिंग होगी।
दूसरे फेज में कहां-कहां मतदान :
दूसरे फेज में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया,कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद,अरवल, रोहतास, कैमूर यानी कुल 20 जिलों में मतदान होगा.

