डॉ निशा सिंह
महाभारत में संजय की भूमिका एक दिव्य दृष्टि प्राप्त सलाहकार और सारथी की थी, जिन्होंने अंधे धृतराष्ट्र को कुरुक्षेत्र में चल रहे महाभारत युद्ध का आंखों-देखा हाल सुनाया। ऋषि व्यास द्वारा दिए गए वरदान के कारण, संजय युद्ध को दूर से देख सकते थे और धृतराष्ट्र को इसका वर्णन करते थे। उन्होंने ही धृतराष्ट्र को अर्जुन को दी गई भगवद्गीता का उपदेश भी सुनाया था, जो उन्हें अर्जुन और कृष्ण के बीच हुई बातचीत सुनकर प्राप्त हुआ था। ये तो रही महाभारत की बात। अब आपको बतातें है- बिहार चुनाव में महाभारत की।
बिहार विधान सभा चुनाव 2025 के महाभारत में भी संजय की भूमिका दिख रही है। एनडीए और महागठबंधन दोनों दलों में महाभारत काल के दिव्य दृष्टि प्राप्त सलाहकार और सारथी की भूमिका में संजय (संजय यादव-राजद और संजय झा-जद यू) हैं। इस महाभारत में क्या इन दोनों की भूमिका विजय दिलवाने में मदद करेगी ?
बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में एनडीए और महागठबंधन में सीधा मुकाबला होने जा रहा है। एनडीए और महागठबंधन दोनों में चाणक्य (अमित शाह, नीतीश कुमार) का लिटमस टेस्ट भी हो रहा है। एनडीए सरकार को बचाने की चुनौती है। अमित शाह, नीतीश कुमार दोनों को एनडीए का चाणक्य माना जाता है। इसके बीच अब एनडीए और महागठबंधन दोनों दलों में महाभारत काल के दिव्य दृष्टि प्राप्त सलाहकार और सारथी की भूमिका में संजय नजर आ रहे हैं। एनडीए के सारथी संजय यानि संजय झा (जद यू के कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद) हैं, तो महागठबंधन में राजद के सारथी संजय यादव (राजद सांसद) हरियाणा के रहने वाले हैं। संजय झा, नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों के करीबी हैं। जबकि राजद वाले संजय यादव, तेजस्वी यादव के करीबी हैं। इसके बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी दस्तक दिया है। प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार यानि चाणक्य हैं, जो अबकी बार बिहार में अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा रहे हैं।
जदयू के सारथी संजय झा के बारे में जानिए
संजय यानि संजय झा वर्तमान में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और संसद हैं। नीतीश कुमार के बेहद करीबी हैं। पार्टी के हरेक फैसले में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। बिहार और दिल्ली के बीच सेतु का काम करते हैं। यानि नीतीश कुमार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच कोई भी संवाद होने हैं तो, संजय झा, नीतीश कुमार के सारथी बन जाते हैं। यानि महाभारत में संजय की एक दिव्य दृष्टि प्राप्त सलाहकार और सारथी की जो भूमिका थी, उस भूमिका में दिखतें हैं। वर्ष 2024 के जून महीने में जेडीयू नेता संजय झा को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। संजय झा नीतीश कुमार के काफी करीबी और विश्वस्त नेताओं में माने जाते हैं। झा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि भाजपा नेतृत्व के साथ उनके अच्छे संबंध माने जाते हैं। वर्ष 2024 में संजय झा की सलाह पर ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजद को छोड़कर भाजपा के साथ आने पर राजी हुए थे। लोकसभा चुनाव में एनडीए के साथ आने के कारण भाजपा की सीट कम जरूर हुई, लेकिन सही अर्थों में इससे जदयू और भारतीय जनता पार्टी दोनों को फायदा हुआ।
वह राज्यसभा में जेडीयू संसदीय दल के नेता भी हैं और परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं। इससे पहले, झा ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में टिकट बंटबारे में संजय झा पर जदयू के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को बरगलाकर जदयू के कई नेताओं को बेटिकट किया गया है।
कौन हैं राजद के सारथी संजय यादव ?
राजद के नए सारथी संजय यादव वर्तमान में राजद सांसद हैं और तेजस्वी यादव के बेहद ही करीबी हैं। पार्टी के हर फैसले लेने में इनकी भूमिका रहती है। हरियाणा के रहने वाले संजय यादव, पिछले विधान सभा चुनाव के समय से ही तेजस्वी यादव के साथ हैं। पार्टी के रणनीतिकार हैं। लालू यादव पर उम्र हावी है, पार्टी से बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को निकाल दिया गया है। बहन मीसा भारती, रोहिणी आचार्य को लगभग साइड कर दिया गया है। अब राजद पार्टी पूरी तरह तेजस्वी यादव के कब्जे में हैं। पार्टी पर पूरी तरह पकड़ बना चुके तेजस्वी यादव अब पुराने नेताओं को साइड करके युवा की टीम लेकर आगे बढ रहे हैं। इन सबको हैंडल संजय यादव करते हैं। लालू एंड फॅमिली में संजय यादव को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। फिर भी तेजस्वी यादव के सारथी संजय यादव, महाभारत के संजय की भूमिका में हैं। इस बार चुनाव राजद के कई पुराने नेताओं को टिकट नहीं दिया गया है, टिकट ले दावेदारों का आरोप है कि संजय यादव ने पैसे लेकर टिकट बेचा है।
बिहार में विधानसभा चुनाव दो फेज में होंगे। पहले फेज का मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरे फेज की वोटिंग 11 नवंबर को होगी। वहीं, मतगणना 14 नवंबर को होगी। बिहार की 243 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे जिसमें पहले चरण में 121 और दूसरे में 122 सीटों पर मतदान होगा।

